घाट-घाट घूमे, निहारी सारी दुनिया!

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रसिद्ध हस्ताक्षर, छंदबद्ध हास्य कविता के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| एक प्रसिद्ध भजन है जिसे उन्होंने आधुनिक संदर्भों में अलग ढंग से प्रस्तुत किया| लीजिए प्रस्तुत है यह कविता – साधू, संत, फकीर, औलिया, दानवीर, … Read more

संडे के दिन रास रचा जाइयो, बुला गई राधा प्यारी!

एक बार फिर से मैं, होली के पावन अवसर पर, सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, स्व. अल्हड़ बीकानेरी जी की लिखी इस आधुनिक रसिया के साथ-   कान्हा बरसाने में आ जइयो, बुला गई राधा प्यारी। असली माखन कहाँ मिलैगो, शॉर्टेज है भारी, चर्बी वारौ बटर मिलैगो, फ्रिज में हे बनवारी, आधी चम्मच मुख … Read more

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