दर्द पुराने निकले 5

कू -ए- क़ातिल में चले जैसे शहीदों का जुलूस,
ख़्वाब यूं भीगती आँखों को सजाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद

दर्द पुराने निकले 4

दश्त-ए-तन्हाई ए हिजरा में खड़ा सोचता हूं,
हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद

दर्द पुराने निकले 3

दिल ने एक ईंट से तामीर किया ताजमहल,
तूने एक बात कही लाख फसाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद

दर्द पुराने निकले 2

फ़स्ल-ए-गुल आई फ़िर एक बार असीनाने-वफ़ा,
अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद

दर्द पुराने निकले!

चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले,
कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले|

अमजद इस्लाम अमजद