तमाम ग़ुंचे तो खिला नहीं करते!

हर इक दुआ के मुक़द्दर में कब हुज़ूरी है,
तमाम ग़ुंचे तो ‘अमजद’ खिला नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

ऐसी दुआ नहीं करते!

जो हम पे गुज़री है जानाँ वो तुम पे भी गुज़रे,
जो दिल भी चाहे तो ऐसी दुआ नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

अगर सिलसिला नहीं करते!

हमें हमारी अनाएँ* तबाह कर देंगी,
मुकालमे** का अगर सिलसिला नहीं करते|
*Ego, **Dialogue

अमजद इस्लाम अमजद

यूँ दिल बुरा नहीं करते!

जहाँ हो प्यार ग़लत-फ़हमियाँ भी होती हैं,
सो बात बात पे यूँ दिल बुरा नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

रफ़ू से सिला नहीं करते!

वफ़ा की आँच सुख़न का तपाक दो इनको,
दिलों के चाक रफ़ू से सिला नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

फिर से जुड़ा नहीं करते!

ये आइनों की तरह देख-भाल चाहते हैं,
कि दिल भी टूटें तो फिर से जुड़ा नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

किसी के हुआ नहीं करते!

हज़ार जाल लिए घूमती फिरे दुनिया,
तिरे असीर किसी के हुआ नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

ज़ख़्म जो दिए हैं भरा नहीं करते!

ये और बात है तुझ से गिला नहीं करते,
जो ज़ख़्म तू ने दिए हैं भरा नहीं करते|

अमजद इस्लाम अमजद

सीने पे सो जाओ किसी दिन!

मैं अपनी हर इक साँस उसी रात को दे दूँ,
सर रख के मिरे सीने पे सो जाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद

रात को चमकाओ किसी दिन!

गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएँ सितारे,
इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन|

अमजद इस्लाम अमजद