मुश्किल इस नादान को समझाना होता है!

आज एक गीत 1971 की फिल्म ‘स्वीटहार्ट’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था आनंद बख्शी जी ने| मुझे यह गीत विशेष रूप से प्रिय है और इसमें लेखन, संगीत और अदायगी सभी लाजवाब हैं

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘स्वीटहार्ट’ के इस मधुर गीत के बोल :


कोई कोई आदमी दीवाना होता है,
मुश्किल इस नादान को समझाना होता है|

दिल की बेज़ुबानियां कुछ और होती हैं,
आँखों में कहानियां कुछ और होती हैं,
होंठों पे कुछ और ही अफसाना होता है|
कोई कोई आदमी दीवाना होता है|

तूफाँ क्या होता है, साहिल किसको कहते हैं,
तनहाई क्या है और मंज़िल किसको कहते हैं,
वो इन सारी बातों से बेगाना होता है|
कोई कोई आदमी दीवाना होता है|

ऐसे इंसां की किस्मत में प्यार नहीं होता,
दिल ही उसके सीने में दिलदार नहीं होता,
टूटा सा एक शीशे का पैमाना होता है|

कोई कोई आदमी दीवाना होता है,
मुश्किल इस नादान को समझाना होता है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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आदमी मुसाफ़िर है !

फिल्मी के अत्यंत प्रसिद्ध और सफल गीतकार स्वर्गीय आनंद बख्शी जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ|

इस गीत में बहुत सरल शब्दों में जीवन दर्शन की कुछ बातें की गई हैं| लीजिए प्रस्तुत है आनंद बख्शी जी का लिखा यह गीत-

आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है,
आते-जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है|

झोंका हवा का पानी का रेला
मेले में रह जाए जो अकेला
वो फिर अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

क्या साथ लाए क्या छोड़ आए
रस्ते में हम क्या छोड़ आए
मंज़िल पे जा के ही याद आता है
आदमी मुसाफ़िर है …

जब डोलती है जीवन की नैया
कोई तो बन जाता है खिवैया
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

रोती है आँख जलता है ये दिल
जब अपने घर के फेंके दिये से
आंगन पराया जगमगाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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लोगों का काम है कहना!

फिल्म जगत के बहुत प्रसिद्ध और सफल गीतकार रहे हैं आनंद बख्शी साहब| उन्होंने बहुत बड़ी संख्या में गीत लिखे हैं, जिनमें कुछ बहुत हल्के-फुल्के भी थे और कुछ गीत बहुत शानदार थे|

आज मैं आनंद बख्शी साहब का यह गीत शेयर कर रहा हूँ जो बहुत सुंदर और भावपूर्ण है, यह गीत फिल्म- अमर प्रेम से है और राजेश खन्ना जी पर फिल्माया गया था| आर डी बर्मन जी के संगीत निर्देशन में यह गीत किशोर कुमार जी ने गाया है|

कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना,
छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत ना जाए रैना|
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना|

कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर एक सुबह की शाम हुई,
तू कौन है, तेरा नाम है क्या, सीता भी यहाँ बदनाम हुई|
फिर क्यूँ संसार की बातों से, भीग गये तेरे नयना
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना|



हमको जो ताने देते हैं, हम खोए हैं इन रंगरलियों में,
हमने उनको भी छुप छुपके, आते देखा इन गलियों में,
ये सच है झूठी बात नहीं, तुम बोलो ये सच है ना|
कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना|


आज के लिए इतना ही

नमस्कार|

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