ऐसा रह रह के पुकारा कौन करे!

‘मुल्ला’ का गला तक बैठ गया बहरी दुनिया ने कुछ न सुना,
जब सुनने वाला हो ऐसा रह रह के पुकारा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

साहिल का इरादा कौन करे!

कश्ती मौजों में डाली है मरना है यहीं जीना है यहीं,
अब तूफ़ानों से घबरा कर साहिल का इरादा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

उसको फ़साना कौन करे!

इक दर्द है अपने दिल में भी हम चुप हैं दुनिया ना-वाक़िफ़,
औरों की तरह दोहरा दोहराकर उसको फ़साना कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

फूलों का नज़ारा कौन करे!

बसने दो नशेमन को अपने फिर हम भी करेंगे सैर-ए-चमन,
जब तक कि नशेमन उजड़ा है फूलों का नज़ारा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

गुलशन की तमन्ना कौन करे!

जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी,
अब एक फ़सुर्दा दिल लेकर गुलशन की तमन्ना कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

तिनकों पे भरोसा कौन करे!

जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे,
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

हर बार तक़ाज़ा कौन करे!

ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे,
ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

अरमान को रुस्वा कौन करे!

जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे,
अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे|

आनंद नारायण मुल्ला

अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया!

लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब,
अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

आ गया काँटों में रहना आ गया!

एक ना-शुकरे चमन को रंग-ओ-बू देता रहा,
आ गया हाँ आ गया काँटों में रहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला