कब ख़ुदा होने से डरता है!

न बस में ज़िन्दगी इसके न क़ाबू मौत पर इसका,
मगर इन्सान फिर भी कब ख़ुदा होने से डरता है|

राजेश रेड्डी

मिट्टी के घर नहीं आते!

तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते,
इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते|

वसीम बरेलवी