उस हाल में जीना लाज़िम है!

वह मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से,
उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी

जलने का क़रीना मुश्किल है!

वह शोला नहीं जो बुझ जाए आँधी के एक ही झोंके से,
बुझने का सलीका आसाँ है, जलने का क़रीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी

अब चाके-दिले-इन्सानियत को!

जब नाखूने-वहशत चलते थे, रोके से किसी के रुक न सके,
अब चाके-दिले-इन्सानियत को सीते हैं तो सीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी

इस दौर में जीना मुश्किल है!

यह दौरे खिरद है, दौरे-जुनूं इस दौर में जीना मुश्किल है,
अंगूर की मै के धोखे में ज़हराब का पीना मुश्किल है|

अर्श मलसियानी

हमदम कोई हमराज़ भी है!

दिल-ए-बेगाना-ख़ूँ, दुनिया में तेरा,
कोई हमदम कोई हमराज़ भी है|

अर्श मलसियानी

इसमें रूह की आवाज़ भी है!

मेरी ख़ामोशि-ए-दिल पर न जाओ,
कि इसमें रूह की आवाज़ भी है|

अर्श मलसियानी

पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है!

नशेमन के लिये बेताब ताईर,
वहाँ पाबन्दी-ए-परवाज़ भी है|

अर्श मलसियानी

ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है!

मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है,
ये ख़ामोशी भी है आवाज़ भी है|

अर्श मलसियानी