तभी तो देख कर पोते को!

उछलते खेलते बचपन में बेटा ढूँढती होगी,
तभी तो देख कर पोते को दादी मुस्कुराती है|

मुनव्वर राना

ये दो वक्त सुहाने से मिले!

मां की आगोश में कल मौत की आगोश में आज,
हम को दुनिया में ये दो वक्त सुहाने से मिले|

कैफ़ भोपाली