जो लौट आया हो घर शाम के बाद!

उससे दरयाफ़्त न करना कभी दिन के हालात,
सुब्ह का भूला जो लौट आया हो घर शाम के बाद|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

छान के फटक के मुझे!

मैं देर रात गए जब भी घर पहुँचता हूँ,
वो देखती है बहुत छान के फटक के मुझे|

राहत इन्दौरी