दो-चार दुकानों से बनाए रखना!

दिन को दिन, रात को जो रात नहीं कहते हैं,
फ़ासले उनके बयानों से बनाए रखना|

एक बाज़ार है दुनिया जो अगर ‘राही जी’,
तुम भी दो-चार दुकानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही

मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना!

शायरी ख़्वाब दिखाएगी कई बार मगर,
दोस्ती ग़म के फ़सानों से बनाए रखना|

आशियाँ दिल में रहे आसमान आँखों में,
यूँ भी मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही

ठौर-ठिकानों से बनाए रखना!

जाने किस मोड़ पे मिट जाएँ निशाँ मंज़िल के,
राह के ठौर-ठिकानों से बनाए रखना|

हादसे हौसले तोड़ेंगे सही है फिर भी,
चंद जीने के बहानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही

दिवानों से बनाए रखना!

अक़्ल कहती है, सयानों से बनाए रखना,
दिल ये कहता है, दिवानों से बनाए रखना|

लोग टिकने नहीं देते हैं कभी चोटी पर,
जान-पहचान ढलानों से बनाए रखना|

बालस्वरूप राही

सज्जन किसका काम बनाए!

शिष्टाचार भ्रष्टता दोनों—
ने अपने सब द्वैत मिटाए ।

दुर्जन पार लगाता नैया,
सज्जन किसका काम बनाए ।

बालस्वरूप राही

जो न बिके मूरख कहलाए!

तड़क-भड़क संतो की ऐसी,
दुनियादार देख शरमाए ।

जो बिक जाता धन्य वही है,
जो न बिके मूरख कहलाए ।

बालस्वरूप राही

जहाँ गए जाकर पछताए!

झूठे जग में सच्चे सुख की,
क्या तो कोई आस लगाए ।

देवालय हो या मदिरालय,
जहाँ गए जाकर पछताए ।

बालस्वरूप राही

जीवन-भर अकुलाए!

ज्ञान ध्यान कुछ काम न आए,
हम तो जीवन-भर अकुलाए ।

पथ निहारते दृग पथराए,
हर आहट पर मन भरमाए ।

बालस्वरूप राही