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बंगलौर में एक दिन!

हैदराबाद से रात्रि में चलने वाली स्लीपर बस द्वारा बंगलौर आया, बहुत दिनों के बाद नाइट बस में यात्रा और देर रात में मिड-वे ढ़ाबे में खाना खाने का अनुभव दोहराया। एक दिन आराम करने के बाद सोचा कि बंगलौर में ही किसी स्थान पर धावा बोला जाए।
बंगलौर में स्थानीय भ्रमण के अंतर्गत मैं पहले लाल-बाग बोटेनिकल गार्डन गया, बहुत पहले यहाँ गया था, सोचा कि इस बार एक ब्लॉगर की निगाह से इस स्थान को देखा जाए।

शायद यह भारतवर्ष का पहला सुनियोजित बोटेनिकल गार्डन है, जिसकी संकल्पना और स्थापना बहुत पहले ‘हैदर अली’ के शासन काल में हुई, बाद में ‘टीपू सुल्तान’ के शासन काल में इसको और समृद्ध किया गया और बाद में ब्रिटिश शासन काल में और स्वतंत्र भारत में यह और विकसित होता गया है।

अनेक प्रजातियों के वृक्षों और फूलों की पौध और अनेक विकसित वृक्ष यहाँ पर हैं, एक योजनाबद्ध रूप से अनेक सेक्शन यहाँ बनाए गए हैं, पूरा बाग देखने के लिए काफी लंबा समय लग सकता है और यह भी डर लगा रहता है कि शायद कुछ हिस्सा छूट जाए, इसलिए बेहतर है कि आप एक बार वहाँ घुमाने वाली गाड़ी में घूम लें और जिस हिस्से में आप अधिक समय बिताना चाहें, वहाँ पैदल घूम सकते हैं, गौर से कुच चीजों को देख सकते हैं। वैसे जिन जोडों को एकांत में समय बिताने की जरूरत हो, वे तो पूरा दिन यहाँ रह सकते हैं।

 

मुझे तो पेड़ पौधों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, मुझे लग रहा था कि मेरे मित्र वसीउल्लाह खान यहाँ जाएं तो बहुत से पुराने पेड़ों को बहुत गौर से देखेंगे और शायद उनसे बात भी करते।
वैसे यहाँ ‘फ्लोरल क्लॉक’, विशाल झील तथा और भी अनेक स्थान ऐसे हैं जो बहुत आकर्षक हैं और निश्चित रूप से यह स्थान एक बार अवश्य जाने लायक है।

 

 

लाल बाग के बाद मैंने ‘बंगलौर पैलेस’ की तरफ बढ़ा। बंगलौर पैलेस में एक विशेष आयोजन देखने का अवसर मिला, वहाँ ‘टैक समिट’ नाम से टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली अनेक कंपनियों के आकर्षक स्टॉल लगे थे, जिनमें तकनीकी क्षेत्र में उनके द्वारा उठाए जा रहे नए कदमों की जानकारी दी जा रही थी और वहाँ एक तकनीकी क्विज, भी चल रही थी। वहाँ अचानक यह प्रदर्शनी देखना भी एक अच्छा संयोग था।

 

 

इसके बाद मैं बंगलौर पैलेस में गया, जो राजसी शान-ओ-शौकत का, पुराने जमाने में झांकने का एक अच्छा अवसर था। इस महल में प्राचीन आर्टिटैक्चर, आंतरिक सजावट, प्राचीन पेंटिंग्स आदि का अमूल्य खजाना मौजूद है तथा उनको देखना एक अलग ही अनुभव से गुजरना है। यहाँ 250/- प्रवेश टिकट है और मोबाइल द्वारा फोटो खींचने के लिए 300/- अलग से जमा कराने पड़ते हैं। लेकिन इस प्रकार आप एक अच्छे अनुभव से गुज़र पाते हैं और चित्रों का बहुत सुंदर कलेक्शन आपके पास हो जाता है।

 

आज की इस यात्रा में मुझे लगता है कि अधिक लिखने की जगह अधिक चित्र शेयर करना बेहतर है, लेकिन उसकी भी तो यहाँ सीमा है, कुछ चित्र यहाँ शेयर कर रहा हूँ।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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