एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ!

दुनिया मुझे साहिल से खड़ी देख रही है,
मैं एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ|

मुनव्वर राना

किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!

तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना,
ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है|

महेश चंद्र नक़्श

कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते!

लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो,
ऐसे दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते|

गुलज़ार

कोई तो पार गुज़रे!

बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे,
कोई तो पार उतरे कोई तो पार गुज़रे|

मीना कुमारी