जीना न हो हराम, चलो मयकदे चलें!

ज़नाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| ‘नूर’ साहब उस समय शायरी के क्षेत्र में सक्रिय गिने-चुने हिन्दू शायरों में से एक थे| कई बार ऐसी प्रतियोगिता भी होती थीं, जिनमें एक मिसरे को लेकर ग़ज़ल के शेर लिखने को कहा जाता था| एक बार ग़ज़ल लिखने के लिए … Read more

कविता मेरी मधुशाला- हरिवंश राय बच्चन

आज मन है कि स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी के प्रसिद्ध काव्य – मधुशाला के कुछ छंद आपके साथ शेयर करूँ| ख़ैयाम की रुबाइयों के आधार पर रचित इस काव्य को जब बच्चन जी काव्य मंचों पर प्रस्तुत करते थे तो श्रोता समुदाय झूम उठता था|     बच्चन जी का यह काव्य अत्यधिक लोकप्रिय … Read more

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