हर मय-कश का दिल टूट गया!

साक़ी के हाथ से मस्ती में जब कोई साग़र छूट गया,
मय-ख़ाने में ये महसूस हुआ हर मय-कश का दिल टूट गया|

शमीम जयपुरी

होश से जाए ख़ुद भी!

ऐसा साक़ी हो तो फिर देखिए रंगे-महफ़िल,
सबको मदहोश करे होश से जाए ख़ुद भी|

अहमद फ़राज़

सब पे साक़ी की नज़र हो!

सब की नज़रों में हो साक़ी ये ज़रूरी है मगर,
सब पे साक़ी की नज़र हो ये ज़रूरी तो नहीं|

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी