तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता!

मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है,
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता|

बशीर बद्र

हज़ारों शेर मेरे सो गए!

हज़ारों शेर मेरे सो गए काग़ज़ की क़ब्रों में,
अजब माँ हूँ कोई बच्चा मिरा ज़िंदा नहीं रहता|

बशीर बद्र

मिलने में हमेशा फ़ासला रखना!

बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना,
जहाँ दरिया समुंदर से मिला दरिया नहीं रहता|

बशीर बद्र

देर तक चेहरा नहीं रहता!

परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता,
किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता|

बशीर बद्र

तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है !

तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं,
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई|

बशीर बद्र

शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई!

तिरे हाथ से मेरे होंट तक वही इंतिज़ार की प्यास है,
मिरे नाम की जो शराब थी कहीं रास्ते में छलक गई|

बशीर बद्र

न कभी तुम्हारी झिझक गई!

भला हम मिले भी तो क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले,
न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई|

बशीर बद्र

मेरी रात कैसे चमक गई!

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई,
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई|

बशीर बद्र

ये कलाम किसका कलाम है!

कोई नग़्मा धूप के गाँव सा कोई नग़्मा शाम की छाँव सा,
ज़रा इन परिंदों से पूछना ये कलाम किसका कलाम है|

बशीर बद्र

न उदास हो न मलाल कर!

न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर,
कई साल बा’द मिले हैं हम तिरे नाम आज की शाम है|

बशीर बद्र