फिर मुलाक़ात होगी!

मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी,
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी|

बशीर बद्र

न बादल घिरेंगे न बरसात होगी!

सदाओं को अल्फ़ाज़ मिलने न पाएँ,
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी|

बशीर बद्र

हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी!

जहाँ वादियों में नए फूल आए,
हमारी तुम्हारी मुलाक़ात होगी|

बशीर बद्र

तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी!

चराग़ों की लौ से सितारों की ज़ौ तक,
तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी|

बशीर बद्र

चलो मय-कदे में वहीं बात होगी!

परेशाँ हो तुम भी परेशाँ हूँ मैं भी,
चलो मय-कदे में वहीं बात होगी|

बशीर बद्र

दूर तक रात ही रात होगी!

चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना,
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी|

बशीर बद्र

तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी!

मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा,
तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी|

बशीर बद्र

नए लोग होंगे नई बात होगी!

कहाँ आँसुओं की ये सौग़ात होगी,
नए लोग होंगे नई बात होगी|

बशीर बद्र

गुज़र जाए ख़बर लगता है!

चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है,
तू जिधर हो के गुज़र जाए ख़बर लगता है|

वसीम बरेलवी

कोई गले लगाए मुझे!

मैं चाहता हूँ कि तुम ही मुझे इजाज़त दो,
तुम्हारी तरह से कोई गले लगाए मुझे|

बशीर बद्र