ज़िंदगी की शाम हो जाए!

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए|

बशीर बद्र

मौसम बहुत सताएगा!

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है,
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा |

बशीर बद्र

किस रास्ते से आएगा!

मैं अपनी राह में दीवार बन के बैठा हूँ ,
अगर वो आया तो किस रास्ते से आएगा |

बशीर बद्र

आंखें हमारी कहां से लाएगा!

तुम्हें ज़रूर कोई चाहतों से देखेगा,

मगर वो आंखें हमारी कहां से लाएगा|

बशीर बद्र