गुलशन का कारोबार चले!

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
चले भी आओ के गुलशन का कारोबार चले|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मंज़ूर था परदा तेरा!

हम भी वहीं मौजूद थे, हम से भी सब पूछा किए,
हम हँस दिए, हम चुप रहे, मंज़ूर था परदा तेरा।

इब्ने इंशा

वो ज़मीं महके वो शजर महके!

वो घड़ी, दो घड़ी जहाँ बैठे,
वो ज़मीं महके वो शजर महके|

डॉ. नवाज़ देवबंदी

हाथ लगा कर देखूं !

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूं
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं |

राहत इन्दौरी

जो वीरान महल पड़ता है!

कल वहाँ चांद उगा करते थे हर आहट पर
अपने रास्ते में जो वीरान महल पड़ता है|

राहत इन्दौरी

आईना अभिशाप है सूने मकान में!

तस्वीर के लिये भी कोई रूप चाहिये,
ये आईना अभिशाप है सूने मकान में।

उदय प्रताप सिंह

चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी!

चाल ऐसी है मदहोश मस्ती भरी
नींद सूरज सितारों को आने लगी
इतने नाज़ुक क़दम चूम पाये अगर
सोते सोते बियाबान गाने लगे
मत महावर रचाओ
मत महावर रचाओ बहुत पाँव में
फर्श का मरमरी दिल बहल जाएगा|

नई उमर की नई फसल