झूमर तेरे माथे पे हिला करता है!

रात यों चाँद को देखा है नदी में रक्साँ,
जैसे झूमर तेरे माथे पे हिला करता है|

क़तील शिफ़ाई

सूरजमुखी है वो नौगुल!

दिन को सूरजमुखी है वो नौगुल,
रात को है वो रातरानी भी।

फ़िराक़ गोरखपुरी

हर चेहरा तुम जैसा लगता है!

कहीं-कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है,
तुमको भूल न पायेंगे हम, ऐसा लगता है|

निदा फ़ाज़ली

चमकने लगा है रुख ए यार सा!

अपना रंगे ग़ज़ल उसके रुखसार सा,
दिल चमकने लगा है रुख ए यार सा|

बशीर बद्र

मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें !

मेरी आँखों पे ही क्यों ये तोहमतें,
अपने बारे में भी सोचा आपने।

नक़्श लायलपुरी

दिलरुबा महकी महकी!

ये कौन आ गई दिलरुबा महकी महकी,
फ़िज़ा महकी महकी हवा महकी महकी|

हसरत जयपुरी

चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं!

वो अपने चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं,
इसीलिये तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं|

हसरत जयपुरी

रहना था उसको साथ मेरे!

वो हुस्न-ए-नौबहार अबद शौक़ जिस्म सुन,
रहना था उसको साथ मेरे, पर नहीं रहा|

मुनीर नियाज़ी