दृश्य ही अदृश्य हो जाएगा!

स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| मैं उनसे कभी मिला नहीं, फ़ेसबुक पर मेरे मित्र थे, अपनी रचनाओं के बारे में सूचना देते रहते थे, जिनको पढ़कर मैं काफी प्रभावित होता था, विशेष रूप से फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ जी पर उन्होंने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है| विभिन्न विषयों पर, अनेक रचनाकारों के संबंध में उनके अत्यंत सारगर्भित आलेख मैंने फ़ेसबुक पर ही पढे और कुछ चर्चाओं में भाग भी लिया|

फिर एक-दो बार उन्होंने लिखा कि वे अस्वस्थ हैं और फिर 21 अक्टूबर,2021 को उनके देहांत का दुःखद समाचार भी मिला| स्वर्गीय यायावर जी का स्मरण करते हुए आज उनकी यह कविता शेयर कर रहा हूँ –



एक दृश्य है जो अदृश्य हो गया है
उसका बिम्ब मन में उतर गया है
मैं चुप हूँ
चुपचाप चला जाऊँगा
कहाँ
किस ओर
किस जगह
अदृश्य !

किसी के मन में यह बात प्रकट होगी
कि एक दृश्य था
अदृश्य हो चला गया है !

अब उसके शब्द जो हवा में सनसनाते थे
किसी के साथ कुछ दूर घूम आते थे
उसके विचार कहीं मानो किसी गुफ़ा से निकलते थे
पहले गुर्राते थे
फिर गले लगाते थे
फिर कुछ चौंक – चौंक जाते थे
फिर बहुत चौंकाते थे

अब उसकी कहीँ छाया तक नहीं है
अब कोई पहचान भी नहीं है
दृश्य में अदृश्य हो जाएगा
कहीं नज़र नहीं आएगा !

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********