दिल ने तड़पना छोड़ दिया!

जब दिल ने तड़पना छोड़ दिया,
जलवों ने मचलना छोड़ दिया|

बेकल उत्साही

नहीं कोई मकाँ मेरा!

मैं जब लौटा तो कोई और ही आबाद था “बेकल”,
मैं इक रमता हुआ जोगी, नहीं कोई मकाँ मेरा|

बेकल उत्साही

यही जन्नत निशाँ मेरा!

कहीं बारूद फूलों में, कहीं शोले शिगूफ़ों में,
ख़ुदा महफ़ूज़ रक्खे, है यही जन्नत निशाँ मेरा|

बेकल उत्साही

ये अन्दाज़-ए-बयाँ मेरा!

पड़ेगा वक़्त जब मेरी दुआएँ काम आएंगी,
अभी कुछ तल्ख़ लगता है ये अन्दाज़-ए-बयाँ मेरा|

बेकल उत्साही

तुम जला दो आशियाँ मेरा!

सुकूँ पाएँ चमन वाले हर इक घर रोशनी पहुँचे,
मुझे अच्छा लगेगा तुम जला दो आशियाँ मेरा|

बेकल उत्साही