क्या जाने किस भेस में बाबा!

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी फिल्म जगत के एक अनूठे गीतकार स्वर्गीय पंडित भरत व्यास जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भरत व्यास जी ने हिन्दी फिल्मों को कुछ बहुत प्यारे गीत दिए हैं, जैसे- ‘आधा है चंद्रमा, रात आधी’, ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘आ लौट के आ जा मेरे मीत’, ‘ज्योत से ज्योत जलाते चलो’ आदि-आदि|

लीजिए आज प्रस्तुत है पंडित भरत व्यास जी का यह गीत-

बड़े प्यार से मिलना सबसे
दुनिया में इंसान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|

कौन बड़ा है कौन है छोटा
ऊँचा कौन और नीचा
प्रेम के जल से सभी को सींचा
यह है प्रभू का बग़ीचा|
मत खींचों तुम दीवारें
इंसानों के दरमियान रे
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


ओ महंत जी
तुम महंत जी खोज रहे
उन्हें मोती की लड़ियों में,
प्रभू को मोती की लड़ियों में|
कभी उन्हें ढूँढा क्या
ग़रीबों की अँतड़ियों में|
दीन जनों के अँसुवन में,
क्या कभी किया है स्नान रे|

क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


क्या जाने कब श्याम मुरारी
आ जावे बन कर के भिखारी|
लौट न जाए कभी द्वार से,
बिना लिए कुछ दान रे|
क्या जाने किस भेस में बाबा
मिल जाए भगवान रे|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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दिल का खिलौना हाय टूट गया!

पंडित भारत व्यास जी के लिखे एक खूबसूरत गीत के बोल आज शेयर कर रहा हूँ| इस गीत को 1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ के लिए वसंत देसाई जी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने बहुत सुंदर ढंग से गाया था| इतना लंबा समय बीत जाने के बाद, आज भी यह गीत हम लोगों के दिल में बसा है|

लीजिए प्रस्तुत हैं फिल्म- ‘गूंज उठी शहनाई’ के इस मधुर गीत के बोल :

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया
हाय कोई लुटेरा आ के लूट गया
दिल का खिलौना हाय टूट गया|

हुआ क्या क़ुसूर ऐसा सैंया हमारा
जाते हुये जो तूने हमें ना पुकारा|
उल्फ़त का तार तोड़ा
हमें मझधार छोड़ा
हम तो चले थे ले के, तेरा ही सहारा
साथी हमारा हमसे छूट गया|

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया|


कैसी परदेसी तूने प्रीत लगाई
चैन भी खोया हमने नींद गँवाई,
तेरा ऐतबार करके
हाय इंतज़ार करके
ख़ुशियों के बदले ग़म की दुनिया बसाई,
ज़ालिम ज़माना हमसे रूठ गया|

दिल का खिलौना हाय टूट गया
कोई लुटेरा आ के लूट गया|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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चन्द्रमुखी था नाम!


एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का गाये एक गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत पुरानी फिल्म ‘चंद्रमुखी’ के लिया लिखा था पंडित भारत व्यास जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था एस एन त्रिपाठी जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी के स्वर में, हमारे मन में गूंजने वाला यह मधुर गीत:

Women's Brown Leather Jacket


नैन का चैन चुराकर ले गई
कर गई नींद हराम
चन्द्रमा सा मुख था उसका
चन्द्रमुखी था नाम
नैन का चैन चुराकर ले गई …

अँखियां नीली और नशीली
दिल में बस गई वो लजीली,
चाँदनी थी मद भरी थी
गगन से उतरी परी थी
याद है वो दिन सुहाना
वो सुहानी शाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …

सुन रहा हूँ वो पैजनिया
बन में नाची एक हिरनिया
याद खोई फिर जगी थी
जानी पहचानी लगी थी
नैन मिलते ही नयन से
मन हुआ बदनाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …


कैसी थी वो क्या कहूँ मैं
इसलिये चुप-चुप रहूँ मैं
प्यार का सिंगार थी वो
स्वप्न का साकार थी वो
उस विधाता की कला की
थी वो पूर्ण विराम|
नैन का चैन चुराकर ले गई …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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मेरी आत्मा की ये आवाज़ है!

हिन्दी फिल्मों के प्रमुख गीतकार और श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय- पंडित भरत व्यास जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भरत व्यास जी का गीत लेखन का अपना अलग अंदाज़ था और एक बात यह कि उनकी रचनाओं में उनकी अटूट आस्था दिखाई देती है| इत्तफाक से एक बात याद आ रही है कि कांग्रेस नेता श्रीमती गिरिजा व्यास उनकी ही बेटी हैं|

आज के गीत में भी पंडित भारत व्यास जी की अडिग आस्था के दर्शन होते हैं, ईश्वर से वे किस अंदाज़ में बात करते हैं, वह देखने लायक है| लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-


ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है,
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …

हम तुम्हें चाहें तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी नहीं हो सकता,
पिता अपने बालक से बिछुड़ से
सुख से कभी नहीं सो सकता|

हमें डरने की जग में क्या बात है
जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है,
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …

प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधर लगे,
प्यार का है ये क़रार जिया अब

इधर सजे और उधर सजे|
तेरी प्रीत पे बड़ा हमें नाज़ है,
मेरे सर का तू ही सरताज है|
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा,
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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तुझे मेरे गीत बुलाते हैं!

हिन्दी फिल्मों के अनूठे गीतकार पंडित भारत व्यास जी का गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भारत व्यास जी ने बहुत सुंदर गीत फिल्मों को दिए हैं, जैसे ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’, ‘जीवन में पिया तेरा साथ रहे’, ‘बड़े प्यार से मिलना सबसे, दुनिया में इंसान रे’, ‘जरा सामने तो आओ छलिए’ आदि-आदि|

आज का यह गीत मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने गाकर अमर कर दिया है| यह गीत फिल्म- संगीत सम्राट तानसेन के लिए भारत व्यास जी ने लिखा और 1957 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘रानी रूपमती’ के लिए एस एन त्रिपाठी जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे गाया है|

आइए इस गीत का आनंद लेते हैं-

 

 

 

आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं,
मेरा सूना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|

 

बरसे गगन मेरे बरसे नयन, देखो तरसे है मन अब तो आजा
शीतल पवन ये लगाए अगन,
ओ सजन अब तो मुखड़ा दिखा जा|
तूने भली रे निभाई प्रीत
तूने भली रे निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|
आ लौट…

 

एक पल है हँसना एक पल है रोना। कैसा है जीवन का खेला
एक पल है मिलना एक पल बिछड़ना
दुनिया है दो दिन का मेला|
ये घड़ी न जाए बीत
ये घड़ी न जाए बीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं|
आ लौट…

 

 

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

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