मुझे तूने मुसीबत से निकाला!

ऐ मौत मुझे तूने मुसीबत से निकाला,
सय्याद समझता था रिहा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

सुना भी नहीं देखा भी नहीं!

अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं,
तूने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं|

फ़िराक़ गोरखपुरी