कोई ज़ख़्म लगाते जाते!

अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत करके,
जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते|

राहत इन्दौरी

ऐब लगाया लोगों ने!

तेरी गली में आ निकले थे दोष हमारा इतना था,
पत्थर मारे, तोहमत बाँधी, ऐब लगाया लोगों ने|

कैफ़ भोपाली

बिछड़ना ज़रूर था!

दुनिया है ये किसी का न इसमें क़ुसूर था,
दो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था|

आनंद नारायण ‘मुल्ला’

किसको इल्ज़ाम दूँ मैं!

किसको इल्ज़ाम दूँ मैं किसको ख़तावार कहूँ,
मेरी बरबादी का बाइस तो छुपा है मुझमें|

राजेश रेड्डी