कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी!

कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी,
तुमसे क्या कहते कि तुमने क्या किया|

जावेद अख़्तर

हाथ तुम्हारा लगता है!

मैं ही न मानूँ मेरे बिखरने में वर्ना,
दुनिया भर को हाथ तुम्हारा लगता है|

वसीम बरेलवी

तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है!

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है,
दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किसी और के सर जाए तो अच्छा!

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है,
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा|

साहिर लुधियानवी

बहुत दिन किसी के साथ!

दुनिया को बेवफ़ाई का इल्ज़ाम कौन दे,
अपनी ही निभ सकी न बहुत दिन किसी के साथ|

वसीम बरेलवी

साथ निभा भी नहीं सकता!

तू छोड़ रहा है तो ख़ता इसमें तिरी क्या,
हर शख़्स मिरा साथ निभा भी नहीं सकता|

वसीम बरेलवी

कोई ज़ख़्म लगाते जाते!

अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत करके,
जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते|

राहत इन्दौरी

ऐब लगाया लोगों ने!

तेरी गली में आ निकले थे दोष हमारा इतना था,
पत्थर मारे, तोहमत बाँधी, ऐब लगाया लोगों ने|

कैफ़ भोपाली

बिछड़ना ज़रूर था!

दुनिया है ये किसी का न इसमें क़ुसूर था,
दो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था|

आनंद नारायण ‘मुल्ला’

किसको इल्ज़ाम दूँ मैं!

किसको इल्ज़ाम दूँ मैं किसको ख़तावार कहूँ,
मेरी बरबादी का बाइस तो छुपा है मुझमें|

राजेश रेड्डी