लहरों से टकराती तो है!

इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है|

दुष्यंत कुमार

कश्ती बादबानी दे गया!

सब हवायें ले गया मेरे समंदर की कोई,
और मुझको एक कश्ती बादबानी दे गया|

जावेद अख़्तर

कोई कोहराम नहीं होता!

दिन डूबे हैं या डूबे बारात लिये कश्ती,
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता|

मीना कुमारी

दरिया उतर गया यारो!

भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क-ए-आब हुई,
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो|

शहरयार