चाँदनी में भिगोया करेंगे हम!

जब दूरियों की आग दिलों को जलाएगी,
जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम|

क़तील शिफ़ाई

ये ज़िस्म बदलना जारी है!

रोज़ सवेरे दिन का निकलना, शाम में ढलना जारी है,
जाने कब से रूहों का ये ज़िस्म बदलना जारी है|

राजेश रेड्डी

जिस्मों को चाँदनी में —

जब दूरियों की आग दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम|

क़तील शिफ़ाई