सूखे हुए फूल किताबों में मिलें!

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें,
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें|

अहमद फ़राज़

दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं!

हर एक वर्क़ में तुम ही तुम हो जान-ए-महबूबी,
हम अपने दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं|

हसरत जयपुरी

ये जो ज़िन्दगी की किताब है!

ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या किताब है|
कहीं इक हसीन सा ख़्वाब है कहीं जान-लेवा अज़ाब* है|

वेदना*

राजेश रेड्डी

इक ख़त छुपा रही थी!

कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में,
इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए|

अंजुम रहबर