ये क़र्ज़ अदा हो नहीं सकता!

पेशानी को सज्दे भी अता कर मिरे मौला,
आँखों से तो ये क़र्ज़ अदा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

सर-आँखों पे लिए जाते हैं!

उनके क़दमों पे न रख सर, के है ये बे-अदबी,
पा-ए-नाज़ुक तो सर-आँखों पे लिए जाते हैं|

शमीम जयपुरी