तेरे बदन की महक छा गई!

अपनी साँसों की ख़ुशबू लगे अजनबी,
मुझ पर तेरे बदन की महक छा गई।

नक़्श लायलपुरी

इबादत में खलल पड़ता है!

उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो,
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है|

राहत इन्दौरी