परिंदा तो वही होता है-

अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है तो क़ैदी है,
परिंदा तो वही होता है जो आज़ाद रहता है|

मुनव्वर राना

बहार आई चमन में या ख़िज़ाँ आई!

क़फ़स में मौसमों का कोई अंदाज़ा नहीं होता,
ख़ुदा जाने बहार आई चमन में या ख़िज़ाँ आई|

मुनव्वर राना