हर सदा पर बुलाती रही रात भर!

जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर,
हर सदा पर बुलाती रही रात भर|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे!

काश ऐसा ताल-मेल सुकूत-ओ-सदा में हो,
उसको पुकारूँ मैं तो उसी को सुनाई दे|

कृष्ण बिहारी नू

मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं!

कोई भी दस्तक करे आहट हो या आवाज़ दे,
मेरे हाथों में मिरा घर तो है दरवाज़ा नहीं|

वसीम बरेलवी

सब कुछ तेरा हूँ मैं!

ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम,
दुनिया समझ रही है के सब कुछ तेरा हूँ मैं|

क़तील शिफ़ाई

इक आवाज़ बुलाने आई!

मैंने जब पहले-पहल अपना वतन छोड़ा था,
दूर तक मुझको इक आवाज़ बुलाने आई|

कैफ़ भोपाली