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ये लंदन-वो दिल्ली!

यह आलेख मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इस वर्ष फिर से वही घटना हो रही है तो थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। पिछले वर्ष एक महीना रुका था, 6 जून से 6 जुलाई तक, इस बार प्रवास डेढ़ महीने का है, 6 अगस्त से 20 सितंबर तक, अब बस चलाचली की बेला है।

 

 

काफी दिन पहले अपने एक भारतीय अखबार में छपा एक कार्टून याद आ रहा है। उस समय लंदन को दुनिया का सबसे खूबसूरत नगर घोषित किया गया था। कार्टून में एक घर का कमरा दिखाया गया था, जिसमें एक भारतीय सरदार जी का परिवार था, सामान इधर-उधर फैला था, कमरे के आर-पार डोरी टांगकर उस पर कपड़े सूख रहे थे, और वो अपनी पत्नी से कह रहे थे- देखो जी, हम दुनिया के सबसे खूबसूरत नगर में रह रहे हैं।

 

 

 

कैसे तुलना करें। दिल्ली की बात- मतलब भारत की बात और लंदन मतलब ब्रिटेन की बात! दोनों नगर प्रतिनिधि तो हैं ही,दो देशों के,दो संस्कृतियों के।

 

 

वैसे हमें दूसरों के सामने खुद को नीचा करके दिखाने की आदत है,लेकिन मैं प्रयास करुंगा इस मामले में संतुलित रहने की।

 

 

अंग्रेजों को देखकर लंबे समय से एक छवि बनी रही है हमारे मन में- ‘टुम हिंदुस्तानी कैसे हमारे सामने खड़े होने की हिम्मत करटा है’। एक टॉम आल्टर थे, अभिनेता जो मूल रूप से अंग्रेज थे और अक्सर बुरे,अत्याचारी अंग्रेजों की भूमिका निभाते रहते थे।
आज की तारीख में दुनिया में जो महानतम लोकतंत्र हैं, उनमें शायद अमरीका, ब्रिटेन और भारत ही सबसे प्रमुख हैं। लेकिन लोकतंत्र की समान कड़ी को छोड़कर बाकी बातों में,संस्कृति में बहुत बड़ा अंतर है।

 

हिंदुस्तानी लोग पारंपरिक रूप से बहुत शांत,संतोषी और सबको प्यार करने वाले रहे हैं। मुझे इस संदर्भ में ‘जिस देश में गंगा बहती है’ का नायक ‘राजू’ याद आता है। वैसे वो भी तो फिल्म में अपनी तरह का अकेला ही था। लेकिन इस संस्कृति में बहुत प्रदूषण व्याप गया है। इस माहौल को खराब करने में आज की राजनीति का भी बहुत बड़ा योगदान है।

 

 

हमारे यहाँ ऐसी पहचान बन गई है कि कुछ खास पार्टियों का सक्रिय सदस्य होने का मतलब है- गुंडा होना।

 

 

लंदन में बहुत बड़ा अंतर जो भारत के मुकाबले, यहाँ आते ही दिखाई देता है, वह है कि यहाँ सार्वजनिक स्थानों पर,एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर कहीं भी आपको प्रेमी युगल चुंबन लेते, लिपटते, प्यार करते दिख जाएंगे। भारत में तो इसे अपराध माना जाता है, हाँ यह थोड़ा-बहुत एयरपोर्ट तक पहुंच रहा है।

 

 

भारत में सरेआम लोग लड़की को छेड़ सकते हैं, लड़ाई-झगड़ा कर सकते हैं, यहाँ तक कि अपहरण और ‘रेप’ भी कर सकते हैं, लेकिन प्रेम नहीं कर सकते! उसको रोकने के लिए ‘एंटी रोमियो स्क्वैड’ और बजरंग दल के महान स्वयंसेवक अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार रहते हैं। इनको यह नहीं लगता कि लूटपाट,दंगा और बलात्कार आदि रोकने में उनकी कोई भूमिका हो सकती है!

 

 

यह बहुत बड़ी बात है कि अंग्रेज, जिनकी छवि हमारे मन में बर्बर, अत्याचारी और नफरत करने वालों की थी,वे आज प्रेम के प्रतिनिधि नजर आते हैं और मानव-मात्र से प्रेम वाली हमारी संस्कृति के प्रतिनिधि- हिंसा और नफरत में लिप्त दिखाई देते हैं।
एक बात मैं अवश्य कहना चाहूंगा कि सच्चे भारतीय आज भी सबसे प्रेम करने वाले और ईश्वर से भय खाने वाले हैं,हाँ महानगरों में कुछ लोग ऐसे सामने आ रहे हैं, और ये लोग अपनी गतिविधियों में इतने सक्रिय हैं कि इनके कारण हमारे देश का नाम खराब हो रहा है।

 

 

आज यह सुनकर बहुत खराब लगता है कि भारत विदेशी महिला सैलानियों के लिए सुरक्षित नहीं है। वास्तव में इस मामले में कानून का भय कायम किए जाने की आवश्यकता है,जिससे विदेशी सैलानी हमेशा हमारे बारे में अच्छी राय रखें, भारत भ्रमण के अच्छे अनुभव लेकर जाएं।

 

 

मैं इंग्लैंड प्रवास में यह बात कह रहा हूँ,क्योंकि मुझे लगता है कि जो लोग भारत आते हैं, वे हमारी मेज़बानी से प्रसन्न होकर जाएं।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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कैनरी व्हार्फ रिवर फ्रंट-लंदन!

अपने लंदन में होने की खबर तो मैंने कल दे दी थी। अब एक फर्क़ तो ये पड़ेगा कि मेरा ब्लॉग का आलेख पोस्ट करने का टाइम बदल जाएगा। जैसे मैं यहाँ देर रात में पोस्ट करूंगा तो वो चिट्ठी भारत में ब्रह्म-मुहूर्त में खुलेगी। जब कुछ नया देखूंगा तो वह पोस्ट यात्रा-ब्लॉग का रूप ले लेगी अन्यथा सामान्य पोस्ट करता रहूंगा।

एक फर्क़ ये पड़ेगा इन दिनों कि मेरा वॉक करने का इलाका अंग्रेजों वाला हो जाएगा। कल कैनेरी व्हार्फ रिवर फ्रंट के बारे में बताया था, जिसकी प्रेरणा अंग्रेजों ने माननीय अखिलेश यादव जी द्वारा विकसित लखनऊ के रिवर फ्रंट से ली थी (मज़ाक है जी!)। काफी सुंदर रिवर फ्रंट है, वैसे ऐसे सुंदर रिवर फ्रंट, दिल्ली में यमुना नदी पर, अहमदाबाद में भी बहुत सुंदर रिवर फ्रंट है और शारजाह में भी कॉर्निश के नाम से जाना जाता है, जहाँ शाम को रंगीन फव्वारों में अनेक दृश्य दिखाए जाते हैं।


हाँ तो वर्ष 2000 तक मुझे लखनऊ के रिवर फ्रंट क्षेत्र में घूमने का अवसर मिलता था, यद्यपि वह बाद में ज्यादा विकसित हुआ। 2010 के बाद कुछ वर्षों तक गुड़गांव में और पिछले 2-3 वर्ष से गोवा में मीरामार बीच वाले क्षेत्र में इवनिंग वॉक का आनंद लेता रहा हूँ, इन दिनों वहाँ बारिश में काफी फिसलन हो गई है, सो मैं वॉक करने के लिए लंदन आ गया जी, ठीक है ना!

आज भी मैं कैनरी व्हार्फ स्टेशन और रिवर फ्रंट के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ।

एक बात मैंने अपनी पिछले वर्ष की यात्रा के समय लिखी थी कि लंदन में आपको लोग वाद्य बजाते, गाना गाते दिख जाते हैं और आप उनको ईनाम दे सकते हैं लेकिन भीख मांगते नहीं दिखते। इस बार मुझे इसमें सुधार करना पड़ेगा, यहाँ हमारे घर के पास ही, कैनरी व्हार्फ स्टेशन जाने के लिए करीब 100 मीटर का हैंगिंग ब्रिज जैसा है, उस पर तीन भिखारी मैंने देखे। यह तो मानना पड़ेगा कि यह प्रोफेशन शायद भारत से ही एक्सपोर्ट हुआ होगा!

आज बस फिर से इस क्षेत्र कैनरी व्हार्फ स्टेशन और रिवर फ्रंट के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ। मैं ज्यादा चित्र शेयर नहीं कर पाता, पता नहीं क्या तकनीकी समस्या है।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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