सब मिरे दिल में उतर गईं!

अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ,
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं|

कैफ़ी आज़मी

मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे!

हमसफ़र चाहिये हुजूम नहीं,
इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे|

अहमद फ़राज़

शोर उठता है कहीं दूर

शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा,
कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है|

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना