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पर दिलों पर हुक़ूमत हमारी रही!

आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ|

यह उस समय की एक पोस्ट है जब मैं अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों, सेवा स्थलों के अनुभवों के बारे में लिख रहा था| ये सभी पुरानी ब्लॉग पोस्ट आप कभी फुर्सत में पढ़ सकते हैं, इनमें श्रेष्ठ कवियों की रचनाएँ भी शामिल हैं|

लगभग ढाई वर्ष के लखनऊ प्रवास और सात वर्ष के ऊंचाहार प्रवास की कुछ छिटपुट घटनाएं याद करने का प्रयास करता हूँ।

एक घटना जो याद आ रही है, वह है लखनऊ के पिकप प्रेक्षागृह में आयोजित कवि सम्मेलन, जिसमें श्री सोम ठाकुर, माणिक वर्मा जी, पं. चंद्रशेखर मिश्र, ओम प्रकाश आदित्य जी आदि के अलावा डॉ. वसीम बरेलवी भी शामिल हुए थे।

इस आयोजन के समय पं. चंद्र शेखर मिश्र जी से काफी विस्तार से बातचीत हुई थी और कुछ समय बाद ही शायद उनका देहांत भी हो गया था। मुझे वाराणसी में अस्सी घाट के निकट उनके आवास पर जाने का भी अवसर मिला था। बहुत श्रेष्ठ रचनाकार थे और विशेष रूप से भोजपुरी साहित्य को उनकी भेंट अतुल्य है। ओम प्रकाश आदित्य जी और माणिक वर्मा जी तो इसके बाद भी हमारे एक-दो आयोजनों में ऊंचाहार आए थे। हास्य-व्यंग्य में जिस गरिमा को उन्होंने बनाए रखा, वह बेमिसाल है। आज वे भी हमारे बीच नहीं हैं, उनको मेरी विनम्र श्रंद्धांजलि।

इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में डॉ. वसीम बरेलवी की शायरी और श्री सोम ठाकुर जी का काव्य पाठ रहे थे। मुझे आज भी याद है सोम जी ने जब इस आयोजन में अपने गीत ‘ये प्याला प्रेम का प्याला है’ का पाठ किया था तब श्रोता मदमस्त हो गए थे।

मुझे ऊंचाहार के लिए एक आयोजन निश्चित करने का प्रसंग याद आ रहा है। भोजपुरी अभिनेता और गायक (जो अभी राजनेता बन गए हैं) श्री मनोज तिवारी का कार्यक्रम निश्चित करना था। जैसा कि एनटीपीसी में होता है, इसके लिए मानव संसाधन, वित्त और शायद क्रय विभाग के सदस्यों को शामिल करते हुए एक कमेटी बनाई गई। सुल्तानपुर में रामलीला के मंच पर, श्री मनोज तिवारी का कार्यक्रम था, यह निश्चित हुआ कि वहाँ जाकर ही हम उनसे बात करेंगे।

इसमें कोई संदेह नहीं कि श्री मनोज तिवारी बहुत लोकप्रिय जन-गायक रहे हैं। यह निश्चित हुआ कि वे कार्यक्रम के बाद चुपचाप अपनी जीप में एक देहाती टाइप रेस्टोरेंट में आ जाएंगे और हम लोग वहीं उनसे मिलकर बात कर लेंगे। इस प्रकार हम लोग कुछ उसी अंदाज में उस रात मिले, जैसे फिल्मों में गैंग्स्टर मिलते हैं। फर्क इतना है कि हमारे हाथों में बंदूकों की जगह कागज़-कलम थे।
बाद में तिवारी जी ने यह भी बताया कि फिल्मों में जाने से पहले वे भी ओएनजीसी में हिंदी अनुवादक के रूप में कार्य करते थे। खैर यह कार्यक्रम भी अन्य कार्यक्रमों की तरह अत्यंत सफल रहा।

अंत में सोम ठाकुर जी की एक श्रेष्ठ रचना प्रस्तुत है, जिसमें बताया गया है कि अमर तो कवि-कलाकार ही होते हैं, क्योंकि वे हमारे दिलों पर राज करते हैं-

यूं दिये पर हर इक रात भारी रही, रोशनी के लिए जंग जारी रही
हम कि जो रात में भोर बोये रहे, सीप में मोतियों को संजोए रहे।


क्या करें हम समंदर के विस्तार का, जिसके पानी की हर बूंद खारी रही।


वक्त का जो हर इक पल भुनाते रहे, जो सदा जग-सुहाती सुनाते रहे,
वो हैं शामिल ज़हीनों की फेहरिस्त में, सरफिरों में हमारी शुमारी रही।


लोग थे जो ज़माने पे छाए रहे, जिनके घर सत्य भी सिर झुकाए रहे।
उनके पर्चम भले ही किलों पर रहे, पर दिलों पर हुक़ूमत हमारी रही।


वक्त के वो कदम चूमकर क्या करे, राजधानी में वो घूमकर क्या करे।
वो किसी शाह के घर मिलेगा नहीं, सोम की तो फक़ीरों से यारी रही।


फिलहाल इतना ही,
नमस्कार।

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ये ऑक्सफोर्ड है जी!

जैसा आप जानते हैं, इन दिनों मैं अगस्त-सितंबर 2019 में किए गए हमारे दूसरे लंदन प्रवास के अनुभव शेयर कर रहा हूँ| प्रस्तुत है यह प्रसंग|

लंदन प्रवास के दौरान कल हम ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी देखने गए थे। जैसे विद्यालयों, विश्वविद्यालयों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, तो यह भी कहा जा सकता है कि यह दुनिया का शायद दूसरा सबसे पुराना शिक्षा का महामंदिर है, जो आज भी चल रहा है।

तो हम लंदन से सुबह रवाना हुए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिए। लंदन के पैटिंगटन रेलवे स्टेशन से ऑक्सफोर्ड के लिए जीडब्लूआर (ग्रेट वेस्टर्न रेलवे) की ट्रेन चलती है। जैसे हम ‘मेरा भारत महान’ कहते हैं, ब्रिटेन, यानि ‘ग्रेट ब्रिटेन’ में तो शायद पहले से ही सब चीजों को ‘ग्रेट’ कहने की परंपरा है।

खैर पैटिंगटन स्टेशन से ट्रेन द्वारा ऑक्सफोर्ड पहुंचने में एक घंटा लगता है, बहुत आकर्षक और सुविधाजनक फास्ट ट्रेन उपलब्ध हैं, रास्ते में दो स्टेशनों पर यह ट्रेन रुकती हैं- स्लॉ (Slough) और रेडिंग (Reading), इन दोनों स्थानों भी काफी बड़ी संख्या में भारतीय और एशियाई लोग रहते हैं।

ऑक्सफोर्ड घूमने का अनुभव अपने आप में अद्वितीय है, जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय विशालता में कहीं भी इसके आस-पास नहीं है और उसको भी कई कैम्पस में बांट दिया गया, यहाँ हॉप ऑन-हॉप ऑफ बस द्वारा पूरा परिसर घूमने में एक घंटा लग जाता है। कौन सा पैमाना है जिसके हिसाब से यह अद्वितीय नहीं है। वह इसके निर्माण की शिल्पकला हो, हर क्षेत्र के लिए उपलब्ध पाठ्यक्रम हों, इस विश्वविद्यालय के प्रकाशन हों, आदि-आदि। इसका पुस्तकालय अनेक मंज़िलों में फैला है और इसके छात्र तो दुनिया भर में फैले ही हैं।


ब्रिटेन पर शासन करने वाले अनेक राजनीतिज्ञ, अमेरिका के अनेक राजनेता, जिनमें बिल-क्लिंटन भी शामिल हैं, यहाँ के छात्र रहे हैं, एक स्थान है जिसके बारे में बताया गया कि वहाँ क्लिंटन नशा करते हुए पकड़े गए थे, खैर उन्होंने शायद इससे इंकार किया था। भारत और पाकिस्तान के भी अनेक नेता यहाँ के छात्र रहे हैं। भारत की पूर्व प्रधान मंत्री- श्रीमती इंदिरा गांधी जी, पाकिस्तान के नेताओं में भी इमरान खान और बेनज़ीर भुट्टो, उनके पिता ज़ुल्फिकार अली भुट्टो आदि भी रहे हैं।


अनेक प्रसिद्ध साहित्यकार यहाँ के छात्र रहे हैं, जिनमें – टी.एस. इलियट भी शामिल थे। इस प्रकार इस विश्वविद्यालय से अनेक ऐसी प्रतिभाएं दुनिया को मिली हैं जिन्होंने राजनीति, साहित्य और फिल्मों में अपना अमूल्य योगदान दिया है। ब्रिटेन के तो अनेक प्रधानमंत्री इस विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कुछ स्थानों और भवनों को देखते ही बच्चों की प्रसिद्ध फिल्म- हैरी पॉटर याद आ जाती है। बच्चों के लिए लिखी गई प्रसिद्ध कहानियों- ‘एलिस इन वंडरलैंड’ के लेखक भी यहाँ के प्रोफेसर थे, जिन्होंने अपनी बेटी के किसी अनुभव से प्रेरित होकर यह लोकप्रिय कहानी लिखी थी, जो दुनिया भर में लोकप्रिय हुई थी।


कहानियां तो बहुत हैं इस बहुत पुराने विश्वविद्यालय से जुड़ी हुई, मैं केवल इससे जुड़े कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ, बाकी कभी इधर आएं तो बस में घूमकर देखें कमेंट्री सुनें जो अनेक भाषाओं में उपलब्ध है, जिनमें हिंदी भी शामिल है, कुछ हिस्सा यहाँ वॉकिंग टूर में घुमाकर दिखाया जाता है और गाइड अंग्रेजी में काफी रोचक अंदाज़ में उनके बारे में बताता है।

घटनाएं बहुत हैं इससे जुड़ी जैसा मैंने कहा, और यहाँ के लोग भी काफी जागरूक हैं, अभी यूके की संसद भंग होने वाली है, इसके विरोध में ब्रिटेन में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो विश्वविद्यालय कैसे अछूता रहेगा। लोग कहीं भी इकट्ठा होकर अपना जंतर-मंतर बना लेते हैं, प्रदर्शन भी चलता रहता है और अन्य गतिविधियां भी होती रहती हैं। कहीं ऐसा नहीं होता कि पुलिस बेरीकेड लगाए और लोग उस पर चढ़कर अपनी मर्दानगी दिखाएं।

एक बात और, कुछ दिन पहले बाथ नगर के बारे में लिखा था, वहाँ रहने वाले सेलिब्रिटीज़ में अंग्रेजी हास्य फिल्मों के कलाकार मि. बीन भी शामिल हैं और हाँ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों में भी वे शामिल हैं, वैसे एक प्रश्न शायद ये भी हो सकता है कि ग्रेट ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्रियों में कौन है, जिसने ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई नहीं की हैं, कोई तो होंगे शायद!

यहाँ कुछ चित्र शेयर किए हैं, वे भी तो कुछ बताएंगे, बाकी कभी मौका लगे तो यहाँ घूम लीजियेगा।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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