चन्द्रमुखी था नाम!


एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी का गाये एक गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत पुरानी फिल्म ‘चंद्रमुखी’ के लिया लिखा था पंडित भारत व्यास जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था एस एन त्रिपाठी जी ने|

लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी के स्वर में, हमारे मन में गूंजने वाला यह मधुर गीत:

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नैन का चैन चुराकर ले गई
कर गई नींद हराम
चन्द्रमा सा मुख था उसका
चन्द्रमुखी था नाम
नैन का चैन चुराकर ले गई …

अँखियां नीली और नशीली
दिल में बस गई वो लजीली,
चाँदनी थी मद भरी थी
गगन से उतरी परी थी
याद है वो दिन सुहाना
वो सुहानी शाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …

सुन रहा हूँ वो पैजनिया
बन में नाची एक हिरनिया
याद खोई फिर जगी थी
जानी पहचानी लगी थी
नैन मिलते ही नयन से
मन हुआ बदनाम|
नैन का चैन चुराकर ले गयी …


कैसी थी वो क्या कहूँ मैं
इसलिये चुप-चुप रहूँ मैं
प्यार का सिंगार थी वो
स्वप्न का साकार थी वो
उस विधाता की कला की
थी वो पूर्ण विराम|
नैन का चैन चुराकर ले गई …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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