प्रचलन बदला शहर हुआ!

धीरे-धीरे हर बस्ती का, प्रचलन बदला शहर हुआ,
सूट-बूट हर वन मानुष ने, धीरे-धीरे डाट लिए|

सूर्यभानु गुप्त