जिसका कोई साया भी नहीं!

प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं,
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं|

क़तील शिफ़ाई

ये बादल इधर न आएगा!

मना रहे हैं बहुत दिन से जश्न-ए-तिश्ना-लबी,
हमें पता था ये बादल इधर न आएगा|

वसीम बरेलवी