छाए थे बादल औ कहीं साया न था!

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था,
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था|

क़तील शिफ़ाई

न बादल घिरेंगे न बरसात होगी!

सदाओं को अल्फ़ाज़ मिलने न पाएँ,
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी|

बशीर बद्र

घटा को बरस जाना चाहिए!

झुकती हुई नज़र हो कि सिमटा हुआ बदन,
हर रस-भरी घटा को बरस जाना चाहिए|

निदा फ़ाज़ली

जो घटाएँ गुज़र गईं!

क्या जाने किसकी प्यास बुझाने किधर गईं,
इस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गईं|

कैफ़ी आज़मी

बिजली, घटा, मल्हार है!

सावन का इश्तिहार है, उस शोख़ का बदन,
बिजली, घटा, मल्हार है, जामुन का पेड़ है।

सूर्यभानु गुप्त

किताबों को हटाकर देखो!

धूप में निकलो घटाओं में नहाकर देखो
ज़िन्दगी क्या है, किताबों को हटाकर देखो |

निदा फ़ाज़ली

बदलियाँ, बरखा रूतें, पुरवाइयाँ!

ज़ख्म दिल के फिर हरे करने लगी,
बदलियाँ, बरखा रूतें, पुरवाइयाँ|

कैफ़ भोपाली

मेरे नाम का बादल भेजो न!

धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो न,
बाबा मेरे नाम का बादल भेजो न|

राहत इन्दौरी

आग में बादल नहा लिए!

सुख, जैसे बादलों में नहाती हों बिजलियां,
दुख, बिजलियों की आग में बादल नहा लिए|

कुंवर बेचैन