कोई हम-सफ़र अच्छा लगा!

गुफ़्तुगू अच्छी लगी ज़ौक़-ए-नज़र अच्छा लगा,
मुद्दतों के बाद कोई हम-सफ़र अच्छा लगा|

अहमद फ़राज़

चलते रहें कहां तन्हा!

हमसफ़र कोई गर मिले भी कभी,
दोनों चलते रहें कहां तन्हा|

मीना कुमारी (महज़बीं बानो)