यादों के लम्हात बरतता हूँ !

कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को,
ऐसे ही मैं यादों के लम्हात बरतता हूँ ।

राजेश रेड्डी

मेरे हाथ में छालों की तरह!

और तो मुझ को मिला क्या मेरी मेहनत का सिला,
चंद सिक्के हैं मेरे हाथ में छालों की तरह|

जां निसार अख़्तर