उँगलियों से फिसल रही है!

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है,
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है|

जावेद अख़्तर

होली की शुभकामनाएं|

कान्हा बरसाने में आ जाइयो,
बुलाय गई राधा प्यारी|


रंग पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं|

ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या!

कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को,
फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या|

ओबेदुल्लाह अलीम