सिर्फ अंगूठे हैं हम लोग!

आज किसी ब्लॉग पोस्ट में ही शेरजंग गर्ग जी का उल्लेख देखा तो सोचा कि उनकी ही रचना आज शेयर की जाए| बहुत पहले जब मैं दिल्ली में रहता था (1980 तक) तब कुछ कवि गोष्ठियों में उनका रचना पाठ सुनने का मौका मिला था, श्रेष्ठ रचनाकार हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री शेरजंग गर्ग … Read more

आँख बच्ची की पनीली है!

आज अदम गोंडवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| ठेठ देहाती अंदाज़ में आम जनता के जीवन की सच्चाइयों को अदम गोंडवी जी ने बड़े सलीके के साथ बेबाक़ी के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज अदम गोंडवी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली … Read more

पंछी पिंजरा तोड़ के आजा, देश पराया छोड़ के आजा!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है –     आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए हैं। वैसे यह खबर नहीं, प्रक्रिया है, जो न जाने कब … Read more

मिली हमें अंधी दीवाली, गूँगी होली बाबू जी!

मेरे अग्रजों में से एक डॉ कुँवर बेचैन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी उस महानन्द मिशन कॉलेज, गाजियाबाद में प्रोफेसर रहे हैं जहां मैंने कुछ समय अध्ययन किया, यद्यपि मेरे विषय अलग थे| दिल्ली में रहते हुए गोष्ठियों आदि में उनको सुनने का अवसर मिल जाता था, बाद में … Read more

कोरोना के असहाय शिकार!

आज कोरोना के खतरे के बाद देश में बनी परिस्थितियों की चर्चा कर रहा हूँ| कितनी भयंकर विपदा यह संपूर्ण मानव जाति पर आई है, ये आप सभी जानते हैं| चीन से शुरू होकर कोरोना के इस दैत्य ने इटली, अमरीका आदि में जैसी तबाही मचाई है, शुक्र है हम अभी वैसी स्थिति में नहीं … Read more

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