ये जानता हूँ मगर-

तमाम उम्र कहाँ कोई साथ देता है,
ये जानता हूँ मगर थोड़ी दूर साथ चलो|

अहमद फ़राज़

कठिन है राहगुज़र!

कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो,
बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो|

अहमद फ़राज़

तो अभी से छोड़ जाओ!

मेरे हमसफ़र पुराने मेरे अब भी मुंतज़िर हैं,
तुम्हें साथ छोड़ना है तो अभी से छोड़ जाओ|

अहमद फ़राज़

मौसम बहुत सताएगा!

तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है,
तुम्हारे बाद ये मौसम बहुत सताएगा |

बशीर बद्र

जाने कौन आस-पास होता है!

गुलज़ार साहब अपनी शायरी में और फिल्मी गीतों में भी एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाने जाते हैं| एक अलग तरह का चमत्कार अक्सर उनकी शायरी और गीतों में देखा जाता है|

लीजिए आज प्रस्तुत है गुलज़ार साहब का यह गीत –

जब भी यह दिल उदास होता है,
जाने कौन आस-पास होता है|

होंठ चुपचाप बोलते हों जब,
सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो|
आंखें जब दे रही हों आवाज़ें,
ठंडी आहों में सांस जलती हो|

आँख में तैरती हैं तसवीरें,
तेरा चेहरा तेरा ख़याल लिए|
आईना देखता है जब मुझको
एक मासूम सा सवाल लिए|


कोई वादा नहीं किया लेकिन,
क्यों तेरा इंतजार रहता है|
बेवजह जब क़रार मिल जाए,
दिल बड़ा बेकरार रहता है|

जब भी यह दिल उदास होता है,
जाने कौन आस-पास होता है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।
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