रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता!

हरेक कश्ती का अपना तज़ुर्बा होता है दरिया में,
सफर में रोज़ ही मंझदार हो ऐसा नहीं होता|

निदा फ़ाज़ली

रुकते हैं गुजर जाते हैं!

जाने किस हाल में हम हैं कि हमें देख के सब,
एक पल के लिये रुकते हैं गुजर जाते हैं|

अहमद फ़राज़

ज्यों लूट ले कहार ही-

ज्यों लूट ले कहार ही दुल्हन की पालकी,
हालत यही है आजकल हिन्दुस्तान की|

गोपालदास ‘नीरज’

अपने हालात बरतता हूँ!

खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,
हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ ।

राजेश रेड्डी