नये-पुराने शहरों में!

हमने भी सोकर देखा है नये-पुराने शहरों में,
जैसा भी है अपने घर का बिस्तर अच्छा लगता है ।

निदा फ़ाज़ली

आधी सोई आधी जागी!

बाँस की खुर्री खाट के ऊपर, हर आहट पर कान धरे|
आधी सोई आधी जागी,थकी दोपहरी जैसी मां |

निदा फ़ाज़ली