लौट आए ख़ुदा ख़ुदा करके!

घर से निकले थे हौसला करके,
लौट आए ख़ुदा ख़ुदा करके|

राजेश रेड्डी

इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती!

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती,
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती|

निदा फ़ाज़ली

क़लंदर हो गदा हो नहीं सकता!

दरबार में जाना मिरा दुश्वार बहुत है,
जो शख़्स क़लंदर हो गदा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

ठोकर में ज़माना है!

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है,
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है|

जिगर मुरादाबादी

जिए जाना चाहिए!

दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए,
जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए|

निदा फ़ाज़ली

तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है!

वीरानों से आ रही है आवाज़,
तख़्लीक़-ए-जुनूँ रुकी नहीं है|

अली सरदार जाफ़री

कुछ रोज़ जी के देखते हैं!

हौसले ज़िंदगी के देखते हैं,
चलिए कुछ रोज़ जी के देखते हैं |

राहत इन्दौरी

जीने का हौसला क्यूँ है!

जो दूर दूर नहीं कोई दिल की राहों पर,
तो इस मरीज़ में जीने का हौसला क्यूँ है|

राही मासूम रज़ा

अभी औरों को सताया जाए!

ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं होती सब में,
और कुछ दिन अभी औरों को सताया जाए|

निदा फ़ाज़ली

हौसले परवरदिगार के!

इक फ़ुर्सते-गुनाह मिली, वो भी चार दिन,
देखें हैं हमने हौसले परवरदिगार के|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़