कल कोई त्योहार होगा!

ये सारे शहर में दहशत-सी क्यों हैं,
यक़ीनन कल कोई त्योहार होगा|

राजेश रेड्डी

हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी!

हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते,
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी|

निदा फ़ाज़ली

तनहाइयों का शिकार आदमी!

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी,
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी|

निदा फ़ाज़ली