Categories
Uncategorized

हमारी आस्थाओं का गणतंत्र !

एक बार हम फिर से लोकतंत्र और सामाजिक विकास में अपनी दृढ़ आस्थाओं को अभिव्यक्त करने का पर्व, गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं| एक बार फिर लोकतंत्र विरोधी ताक़तें राजधानी दिल्ली के आसपास सड़कों को घेरकर बैठी हैं, इस बार उन्होंने किसानों को अपना मोहरा बनाया है| पिछले वर्ष तो कोरोना फैलने के कारण उनको इससे पहले ही आंदोलन खत्म कर देना पड़ा था, इस बार वे अभी तक जमे हैं और अपनी अलग ट्रैक्टर रैली निकाल रहे हैं|

खालिस्तानी संगठन ने उनसे अपील की है कि ट्रैक्टर रैली में राष्ट्रीय तिरंगा लेकर न निकलें| इस पर भी महान लिबरल लोगों को कोई ऐतराज नहीं होगा|


मैं एक मत अपना स्पष्ट रूप से व्यक्त करना चाहता हूँ कि प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव जैसे लोग ‘पाँच सितारा किस्म के देशद्रोही हैं| ऐसे लोगों को शायद भारत में ही बर्दाश्त किया जा सकता है| यह भारत में ही हो सकता है कि हिन्दू आस्थाओं पर चोट करके लोग हीरो बन सकते हैं|

मुझे याद है जब मैं छोटा था किसी ने पैगंबर मुहम्मद साहब की काल्पनिक तस्वीर पुस्तक में छाप दी थी| लोगों ने उसकी विशाल प्रेस में आग लगा दी थी| यहाँ हिन्दू आस्थाओं पर चोट करना तो एक सेक्युलर क्रिया है, बाकी किसी के बारे में ऐसा कुछ करके देखो!


अमेरिका में नए राष्ट्रपति ने बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ ली, क्या किसी लिबरल के मुंह में जमा हुआ दही पिघला! हिंदुस्तान में अगर कोई नेता गीता या रामचरित मानस पर हाथ रखकर शपथ लेगा तो ये ‘लिबरल’ लोग बांस पर चढ़ जाएंगे और कहेंगे कि लोकतंत्र खतरे में आ गया है|


पिछले काफी समय से भारत में ये महान लिबरल लोग ऐसा माहौल बनाने में लगे हैं| इसके लिए वे योजनाबद्ध तरीके से आस्थाओं पर चोट करते हैं| जैसे वे कहेंगे कि ईश्वर कोई नहीं होता! चलिए ईश्वर में बहुत से लोगों का विश्वास नहीं होता, यद्यपि उनका लक्ष्य सिर्फ हिन्दू आस्था पर चोट करना ही होता है| फिर वे कहते हैं देश कुछ नहीं होता, यह केवल भौगोलिक सीमा मात्र है, संस्कृति कुछ नहीं होती, राष्ट्रभक्ति कुछ नहीं होती| यही काम लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजों की शिक्षा पद्यति विकसित करते हुए किया था ताकि लोगों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र गौरव की भावना न रहे और वे आराम से गुलामी स्वीकार कर लें|


बातें बहुत सी हो सकती हैं, लेकिन ऐसे ही लोकतंत्र के इस महापर्व के अवसर पर, दुराग्रहपूर्ण तरीके से सड़कों को घेरकर बैठे और एक देशप्रेमी पत्रकार के तथाकथित चैट लीक होने पर, पाकिस्तान के साथ मिलकर खुशी मनाने वाले लोगों का ताली पीटना यही बताता है कि हमारी उदारता का फायदा उठाकर यहाँ लोग देशद्रोह की सीमा तक जाने को तैयार हैं| इन लोगों को उन पत्रकारों से कोई दिक्कत नहीं होती जो ज़िंदगी भर सत्ता की दलाली करके सुविधाएं और पुरस्कार प्राप्त करते हैं और फिर मौका आने पर एवार्ड वापसी का नाटक करते हैं| भारतीय लोकतंत्र के हित में होगा कि ऐसे लोगों को उनकी सीमा ठीक से समझाई जाए|


सभी देशभक्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई|

***********

Categories
Uncategorized

लंदन का एक और प्रवास !

आज फिर से लंदन प्रवास के प्रसंग शेयर कर रहा हूँ| अब जो विवरण दूंगा वे उससे अगले साल अगस्त-सितंबर के हैं |

पिछले वर्ष (2018) लंदन आया था जून में और एक माह तक यहाँ रहने के बाद जुलाई में वापस गोवा गया था। इस बार फिर लंदन आ पहुंचा हूँ, आशा करता हूँ कि इस बार के प्रवास में भी कुछ अच्छा शेयर कर पाऊंगा।

लंदन में मेरे बेटा-बहू रहते हैं, उनके घर ही इस बार भी आया हूँ, फर्क़ इतना है कि पिछली उनका घर ‘कोल्ड हार्बर’ में थेम्स नदी के किनारे था, वैसे लंदन में मुझे लगता है कि हजारों या शायद लाखों घर थेम्स नदी के किनारे हैं, काफी बड़ी नदी है जिसमें बड़े-बड़े जहाज चलते हैं, और इस नदी से एकदम सटे हुए घर बने हैं लाइन से, यहाँ किसी को बाढ़ का डर नहीं है, कारण मैं नहीं समझ पाया। ऐसा लगता है कि यहाँ जल के बहाव को नियंत्रित और दिशा परिवर्तित करने के लिए काफी प्रभावी इंतज़ाम किए गए हैं।

पिछली बार आया था तब मैं बेटे के घर से ‘इवनिंग वॉक’ के लिए या तो नदी के नीचे ग्रीनविच के निकट बनी टनल तक या टनल के रास्ते कभी ‘ग्रीनविच’ तक भी जाता था, जहाँ एक पुराना विशाल जलयान अब प्रदर्शनी के रूप में रखा है, मैंने उसके बारे में पहले के ब्लॉग्स में लिखा है। ‘इवनिंग वॉक’ की मेरी दूसरी मंज़िल होती थी ‘कैनेरी व्हार्फ’ ट्यूब रेलवे स्टेशन! इस बार सबसे बड़ा अंतर यह है कि बेटे का नया घर अब कैनेरी व्हार्फ रेलवे स्टेशन के पास ही है, इसलिए मुझे ‘वॉक’ के लिए इसको स्टार्टिंग पॉइंट बनाकर कोई नई मंज़िल देखनी पड़ेगी।

यहाँ घर के पास ही दो स्टेशन हैं, एक अंडरग्राउंड ट्यूब स्टेशन और दूसरा ओवर ग्राउंड स्टेशन, जिससे जाने वाली खिलौने जैसी लगने वाली लाल रंग की ट्रेन लगातार दिखाई देती रहती हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं लगता कि दो-दो स्टेशन निकट ही होने के कारण कोई शोर महसूस हो।

घर के बगल से ही अब भी थेम्स नदी से जुड़ी एक नहर जैसी है, जिसके ऊपर बने छोटे से हैंगिंग ब्रिज से होकर स्टेशन से लोग इस पार आते हैं, लगातार देखकर लगता है कि अरे अंग्रेज लोग भी इतनी मेहनत करते हैं, वे भी हम हिंदुस्तानियों की तरह हंसते और रोते भी हैं। एक बात तो यहाँ खास है कि ट्रेन-बस में भी लोग आराम से अपने डॉगी को साथ लेकर चलते हैं और उनके डॉगी भी ‘रिस्पोंसिबली’ बिहेव करते हैं, हाँ अगर कोई गलती कर दें, तब तो उनको अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करनी होगी, मेरा मतलब सफाई करने की!

आज बस इतना ही बताने के लिए था, आगे और बातें करेंगे ना। हाँ नए घर की बॉल्कनी से कैनेरी-व्हार्फ एरिया के कुछ चित्र शेयर कर रहा हूँ, जहाँ बहुत सी कॉर्पोरेट कंपनियों के ऑफिस भी हैं।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।


********

Categories
Uncategorized

लंदन छूटा जाए!

यह रिपोर्ट है जून-जुलाई 2018 में की गई लंदन यात्रा की! यात्राएं तो लगी रहती हैं| आज इस यात्रा का समापन करूंगा और उसके बाद अगस्त-सितंबर,2019 में की गई दूसरी लंदन यात्रा के कुछ प्रसंग शेयर करूंगा|

एक महीने के प्रवास के बाद कल सुबह लंदन छोड़ देंगे। कल दोपहर की फ्लाइट यहाँ से है, सो सुबह ही घर छोड़ देंगे, हाँ उस समय जब भारत में दोपहर होती है। फिर मुंबई होते हुए, परसों सुबह गोआ पहुंचेंगे।

बहुत लंबे समय तक यमुना मैया के पास, दिल्ली में यमुना पार- शाहदरा में रहे, एक वर्ष समुद्र के आकर्षण वाली नगरी मुंबई में रहे, अब गोआ में रहते हैं, जो समुद्र और अनेक ‘बीच’ होने के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन लंदन का अनुभव एकदम अलग था, जहाँ घर को छूते हुए ही समुद्र जैसी लगने वाली नदी ‘थेम्स’ बहती है।



दिन भर यहाँ रंग-बिरंगे आकर्षक शिप और बोट घर से ही देखने को मिलते थे, जो एक अलग ही अनुभव था। दुनिया के दूसरे छोर पर आकर यहाँ के स्थानों और अलग रंग, सभ्यता और संस्कृति वाले लोगों के बीच समय बिताने, एक दूसरी ही दुनिया को देखने का अवसर मिला।

कुछ लोगों की रुचि स्थानों में अधिक होती है, मेरी मनुष्यों में भी समान रूप से रुचि है, हालांकि यहाँ अधिक लोगों से बातचीत का अवसर तो नहीं मिला।

इससे पहले दुबई और यूएई के प्रांतों तथा तंजानिया में घूमने का अवसर मिला था। निश्चित रूप से हर अनुभव अपने आप में नया होता है।

लंबे समय तक एनटीपीसी में सेवा की लेकिन उस सेवा के दौरान कभी विदेश भ्रमण का अवसर नहीं मिला। मुझे याद एक बार एक कवि आए थे, मैं वहाँ कवि सम्मेलनों का आयोजन करता था। तो वे कवि, उनको दिखता भी कम था, ‘भोंपू’ नाम था उनका, उन्होंने एकदम अपनी आंखों से सटाकर मेरा हाथ देखा था और कहा था कि मैं तो पता नहीं जिंदा रहूंगा या नहीं, लेकिन आप दुनिया के कई देश घूमोगे!

मैं सेवा से रिटायर भी हो गया फिर सोचा कि अब कहाँ विदेश जाऊंगा, लेकिन बच्चों का प्रताप है कि कई देशों में घूमना हो गया। कुछ लोगों के लिए विदेश जाना सहज ही रूटीन का हिस्सा होता है लेकिन मेरे मामले में ऐसा नहीं था।

खैर, आज ज्यादा लंबी बात नहीं करूंगा और इसके बाद गोआ पहुंचने के बाद ही बात होगी।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

Categories
Uncategorized

Greatness of History or culture!

A question has been raised, rather a suggestion has been given that Indians should not feel proud of their history and let their past go!

Yes, I personally feel that there is nothing great in our history as a nation, history is otherwise more recent, though it is past, that we remember.

The English people may boast of having a great history, since they ruled over a major part of the world. By whatever way they acquired the reigns of a great country like India is another matter, but they could claim that the ‘Sun never set in their Kingdom’.


As far Indians are concerned, we have been ruled by foreign powers, first the Moghuls and then the British for a very long time. The reason being that we had many small kingdoms and these kings kept fighting amongst themselves. The concept of undivided India, which was developed during the period of Ashoka was lost totally.


There might be some heroes who fought the foreign rule and they can surely be considered great heroes in some parts of the country for their courage, while other kings were bowing down. But I don’t think we find anything to be proud about our recent history, as a nation.


There was a very nice movie also ‘Shatranj Ke Khiladi’ based on a short story written by Munshi Prem Chand Ji. In this movie two friends who considered themselves to be Royal Blood, since their ancestors ruled some states, kept boasting about their bravery and playing the game of chess (Shatranj), while the British forces came and acquired the area, which they claimed to be theirs!

So, what we Indians are proud about is our culture, our values, we might not be following them fully but our culture, our scriptures have taught values which whole world has admired and has been accepted by many countries in some form or other.


Great philosophers like Max Mueller studied our scriptures and wrote a lot about them, there are many foreign dignitaries Like Father Kamil Bulke who earned fame by studying and writing about Ram Charit Manas by Tulsi Das ji.


I would like to submit that, we might have remained divided due to the ambitions of those ruling small kingdoms, we do not have much to feel proud about in our general history, we are performing very nicely as a great democracy and we would always remain proud, for our culture. I feel that Late Sardar Patel Ji makes us more proud than many small kings, since he made these kingdoms become integral part of our independent India.

We often keep remembering our values and we must, like the great film maker Raj Kapur expressed in a film song of ‘Jis Desh Me Ganga Bahti Hai’-


Mehmaan jo hamaaraa hota hai, wo jaan se payara hota hai,
Jyaada ka nahi laalach hamko, thode me gujaaraa hota hai.
Bachchon ke liye jo dharti maa, sadiyon se sabhi kuch sahti hai,
Ham us Desh ke waasi hai, jis desh me Ganga bahti hai.


So, I just want to submit that there may not be much in our recent history, and rightly it is not a good thing to be proud about history but we are and would always remain proud of our culture, our values and keep spreading them.

This is my humble submission on the IndiSpire prompt- Clinging to history and its supposed greatness is as foolish as maintaining that your bum has calluses because your great grandfather rode on an elephant. Real greatness lies in dealing successfully with the present. India should let the past go. #GrappleWithPresent


Thanks for reading.

********



Categories
Uncategorized

अब कहाँ हैं चाणक्य!

शीर्षक पढ़कर आप पता नहीं क्या सोचेंगे! यह भी संभव कि इसको आप आज के किसी राजनैतिक व्यक्तित्व से भी जोड़कर देखने लगें| चाणक्य तो बहुत पहले हुए थे, मौर्यवंश के जमाने में, जिन्होंने सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य को गद्दी पर बैठाया, उसके बाद बिन्दुसार हुए और चाणक्य की पारखी निगाहों ने अशोक को भविष्य में सिंहासन संभालने के लिए चुना और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वातावरण तैयार किया|


आपको ऐसा लग सकता है कि मेरा इतिहास संबंधी ज्ञान ठीकठाक है, तो मैं बता दूँ कि ऐसा बिल्कुल नहीं है| दरअसल मैं आजकल ‘वूट’ (VOOT) पर सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ देख रहा हूँ, जिसमें चाणक्य की भूमिका अभिनेता- मनोज जोशी ने निभाई है, यह सीरियल बहुत पहले टेलीकास्ट हो चुका है, लेकिन हम इसको आजकल देख रहे हैं| वास्तव में कुछ कार्यक्रमों में हम इतने ज्यादा इनवॉल्व हो जाते हैं कि क्या कहें|


इस सीरियल में भी लगभग उतने ही खलनायक और खलनायिकाएँ हैं, जितने सामान्यतः आजकल के सीरियल्स में होते हैं, और फिर बड़ी बात यह है कि यहाँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खलनायक और खलनायिकाएँ शामिल हैं, भारतीय तो हैं ही, यूनानी और खुरासानी भी हैं|

यह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित सीरियल है, जिसमें मौर्यवंश के शासन काल का कुछ हिस्सा दिखाया गया है, और अभी तक जितना हमने देखा है, उसमें अशोक अभी बालक है, जिसे चाणक्य उसके शासक पिता बिन्दुसार के पास ले आए हैं, अनेक बाधाओं के बाद, अशोक और उसकी माता ‘धर्मा’ को राजवंश में उनका उचित स्थान दिला दिया गया है, और जबकि चाणक्य अशोक को भावी शासक बनने के लिए तैयार करने में लगे थे, चाणक्य जिनका सपना था कि अखंड भारत का गौरव और सम्मान, सम्राट अशोक के माध्यम से और बढ़े, उस स्वप्न दृष्टा चाणक्य को देशी-विदेशी खलनायक/खलनायिकाएं मिलकर मार डालते हैं, यहाँ तक पहुंचे हैं हम!


ये दुष्टात्माएँ भारत गौरव का स्वप्न देखने वाले, युगदृष्टा- चाणक्य की हत्या करते हैं, वे चाणक्य जिनका अर्थशास्त्र और राजनीति संबंधी दर्शन आज भी पढ़ा जाता है, वे भी इन लोगों के छल का शिकार हो जाते हैं!


हत्या के इस षडयंत्र में शामिल होते हैं- यूनानी राजमाता- हेलेना, जो अपने पुत्र जस्टिन को सिंहासन पर नहीं बैठा पाई थी, चाणक्य के कारण ही, और एक बार अपना षडयंत्र असफल हो जाने के बाद, अपने स्थान पर अपने पुत्र जस्टिन की कुर्बानी दे देती है| वह षडयंत्र था पूरे मौर्यवंश को लाक्षागृह में जलाकर मार डालने का| जिसमें ईरानी और खुरासानी दोनों शामिल थे|


खैर मैं कहानी के बारे में बहुत ज्यादा चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन ऐसा ही लगता है कि जैसे राजमहल में हर कोई षडयंत्रकारी है| खुरासानी सेनानायक – मीर खुरासन, जिसकी पुत्री राजा बिंदुसार की एक रानी है, लेकिन वह चोरी छिपे प्रेम करती है ईरानी राजमाता के पुत्र- जस्टिन से और वास्तव में उसने जस्टिन के ही बेटे को जन्म दिया है, जो सिर्फ वह जानती है और जस्टिन की मृत्यु के बाद वो ये बात राजमाता को बता देती है और इस प्रकार षडयंत्र में ईरानी और खुरासानी एक साथ हो जाते हैं, (वास्तव में) जस्टिन के पुत्र श्यामक को गद्दी पर बैठाने के लिए राजमाता प्रयासरत है|


उधर बड़ी रानी-चारुमित्रा अपने पुत्र सुशीम को गद्दी पर बैठाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, और सुशीम को भी अनैतिक साधनों का सहारा लेने में कोई संकोच नहीं होता| चारुमित्रा ‘काले जादू’ का सहारा लेकर अशोक और उसकी माँ को अपने मार्ग से हटाना चाहती है| उधर महा अमात्य- खल्लघट को यह कुंठा है कि चाणक्य के रहते उसको अधिक महत्व नहीं मिल पाता है|


इस प्रकार जितने भी खलनायक हैं, उन सबको लगता है कि चाणक्य के रहते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाएंगे, और अंततः वे किसी बहाने से चाणक्य को एकांत स्थान पर बुलाते हैं और मिलकर उसकी हत्या कर देते हैं| इस हत्या में शामिल होते हैं- राजमाता-हेलेना, महा अमात्य- खल्लघट, रानी- चारुमित्रा, उनका महत्वाकांक्षी परंतु नाकारा पुत्र- सुशीम और यहाँ तक कि वे बालक- श्यामक को भी इस जघन्य अपराध में शामिल कर लेते हैं| इस प्रकार मुझे लगता है कि यह इस ऐतिहासिक धारावाहिक का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जबकि षडयंत्रकारियों के मार्ग में चट्टान बनाकर खड़े हुए चाणक्य की मृत्यु हो जाती है|


अब यही देखना है कि चाणक्य ने बालक अशोक पर जो मेहनत की है और जो आशाएँ उससे रखी हैं, वे भविष्य में कहाँ तक पूरी होती हैं| मेरा आशय सीरियल को लेकर है, वैसे तो इतिहास में यह सब बहुत पहले हो चुका है| सीरियल में भी बहुत पहले दिखाया जा चुका है, लेकिन हम तो अब देख रहे हैं न जी!


कुल मिलाकर मुझे यह भी लगा कि आज हम जितनी नैतिकता आदि की बात करते हैं, उस समय राजघरानों में इसका सर्वथा अभाव था| लगता है कि सारे षडयंत्रकारी राजमहल में ही बसे हुए थे|


आज मन हुआ कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक सीरियल के इस पड़ाव पर चर्चा कर ली जाए|


आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|


********

Categories
Uncategorized

A small thing- love for our country!

Talking about small things in life, which hold great importance! What is small or big depends on the thinking of a person and others may consider it small or big based on their thinking or may be values.

 

 

We often try to do things in life which are proper as per our principals, thinking etc. For example ‘faith’ is a matter of faith. We might believe in many things as per our upbringing mostly. For example some people believe in God, some don’t. Loving our country also depends upon us, our personal and family values mostly. For any other person it does not make much difference whether we love our country or not.

Today I take this one thing, which mostly Indians consider very pious is loving our country. Our faith in our culture makes us strong. This is something which the English politician and historian – Lord Macaulay felt that Indian have very strong faith in their motherland and their culture and he felt that this strong faith needs to be erased from the hearts of new people through the education system.

Yes it might appear a small thing, but people like me in the years of their upbringing came across shlokas and poems which give a great teaching and also Samskaara. Like while we say- ‘Vasudhaiv Kutumbakam’ (The whole world is like a family). But we also say- ‘Janani janmabhoomishch swargadapi gariyasi’ (Mother and motherland are more pious than heaven). We have grown listening, to poetic lines, songs etc. explaining the great traditions of our great country and our culture. This is true with most people of my generation.

But now we find that some over educated people of present time. They are in the field of journalism, politics etc. they feel that country is just a geographical boundary. They don’t believe in any great thing associated with our history, civilization or culture. They might rather have chosen to be born in some other country if they had a choice. Such people are also decorated with some national and international awards.

I just want to assert that the love for our country, our culture are very valuable for people like me. But these are not things that should make anybody arrogant and make him consider others to be inferior in anyway. Further one must study in this field and not just have false pride.

I just felt that this is something which many modern people consider to be small but it is in my view very pious which connects us to our roots.

This is my humble submission on the #IndiSpire prompt- Little things can make a lot of difference in life. How do you appreciate little things in life? #lifemotivation

Thanks for reading.

*******

Categories
Uncategorized

पणजी में फिल्म मेले- आईएफएफआई-2019 का दूसरा दिन

एक बार फिर से गोवा फिल्म फेस्टिवल, IFFI-2019 के बारे में लिख रहा हूँ, क्योंकि यह मेरा स्थान है और अपने निवास क्षेत्र के बारे में ऐसी गौरव भरी बात लिखना अच्छा लगता है।

 

जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, आजकल पणजी, गोवा में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 चल रहा है। इस उत्सव के उद्घाटन समारोह के बारे में मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, अब इसी उत्सव से संबंधित कुछ और जानकारी दे रहा हूँ।

एशिया के इस सबसे बड़े फिल्म समारोह के 50वें आयोजन में, जैसी कि घोषणा की गई थी, देश के सर्वमान्य सुपर स्टार, दादासाहब फाल्के सम्मान तथा अन्य अनेकानेक पुरस्कारों से अलंकृत, हिंदी फिल्म जगत के गौरव- श्री अमिताभ बच्चन की फिल्मी यात्रा की उनकी फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुति अर्थात- रैट्रोस्पेक्टिव आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन पणजी की कला-अकादमी में किया जा रहा है, इसमें अमिताभ जी की अनेक प्रतिनिधि फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।

 

 

श्री अमिताभ बच्चन ने कल कला अकादमी, पणजी, गोवा में  रैट्रोस्पेक्टिव का उद्घाटन किया। इस अवसर बोलते हुए श्री बच्चन ने कहा – मैं अत्यंत अभिभूत हूँ और भारत सरकार को इसके हृदय से लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि मैं इस सम्मान के योग्य नहीं हूँ, लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार करता हूँ।

इस फिल्म उत्सव के 50 वें आयोजन के अवसर पर उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार को यह आयोजन इतनी भव्यता के साथ करने के लिए बधाई देता हूँ। प्रतिवर्ष हम पाते हैं कि इसमें भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती जाती है और एक साथ हमें अनेक प्रकार की फिल्में मिलती हैं, जिससे हम विश्व भर की सृजनात्मक फिल्मों में से अपने देखने के लिए कुछ फिल्में चुन सकते हैं।”

श्री बच्चन ने कहा कि फिल्मों की दुनिया विश्व व्यापी है और यह भाषा और क्षेत्र के बंधन तोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि जब हम सिनेमा हॉल में बैठते हैं तब हम अपनी बगल में बैठे किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, रंग नहीं पूछते हैं। हम सब उसी फिल्म का एक साथ आनंद लेते हैं, उस फिल्म के दृश्यों को देखकर एक साथ हंसते हैं और एक साथ रोते हैं, एक जैसी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यह एक अत्यंत सशक्त माध्यम है और उन्होंने आशा व्यक्त की यह माध्यम पूरी निष्ठा से अपना काम करता रहेगा।

उन्होंने एक शांतिपूर्ण और प्रेम से भरी दुनिया बनाए रखने के लिए फिल्मों की भूमिका का उल्लेख किया और आशा व्यक्त की कि वे अपनी इस भूमिका को निरंतर निभाती रहेंगी।

श्री बच्चन का गोवा से खासा जुड़ाव रहा है और उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनकी पहली फिल्म की शूटिंग भी गोवा में हुई थी। उन्होंने कहा कि गोवा आने पर उनको हमेशा ऐसा लगता है जैसे वे अपने घर आये हों। ‘यहाँ मुझे अनेक अवसर मिले हैं और लोगों का बहुत प्यार मिला है’, उन्होंने कहा।

श्री बच्चन की फिल्मों के रैट्रोस्पेक्टिव के अंतर्गत जो फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी उनमें- ‘पा’, शोले, दीवार, ब्लैक, पीकू और बदला शामिल हैं।

+++++

इसके बाद मैं यहाँ समारोह में प्रदर्शित की जा रही एक फिल्म ‘दा हंड्रेड बक्स’ की संक्षिप्त जानकारी दे रहा हूँ।

 

 

यह मोहिनी की कहानी है, मोहिनी और उसके ऑटो चालक अब्दुल की यह एक रात की कहानी पैसे के लिए ग्राहक खोजने में पूरी रात के उनके संघर्ष को प्रदर्शित करती है । आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्देशक- दुष्यंत सिंह, जो एक संगीतकार और गायक भी हैं, ने बताया कि यह फिल्म एक बहुत ही संवेदनशील विषय ‘वेश्यावृत्ति’ पर आधारित है, जिसे अक्सर दुनिया के सबसे पुराने पेशे के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन समाज ने हमेशा वेश्याओं का अपमान किया है। फिल्म जनवरी 2020 में रिलीज़ होगी और पूरे भारत में प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म में पहली बार किसी अभिनेत्री ने इस विषय में एक शक्तिशाली प्रस्तुति दी है।

 

फिल्म की अभिनेत्री कविता जो एक मॉडल है ने बताया कि यह एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म है और करियर की शुरुआत में उन्हे मुख्य किरदार के रूप में एक फिल्म मिली और यह फिल्म महिला प्रधान है । आमतौर पर यह एक पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की स्थितियों को चित्रित करती है। क्योंकि यह फिल्म उद्योग में उसकी शुरुआत है और इस तरह की भूमिका!  एक लड़की होना मेरे लिए भी सौभाग्य की बात है। कविता के अनुसार, निर्देशक दुष्यंत एक अद्भुत निर्देशक हैं और उनके साथ मेरे लिए एक अभिनेत्री के रूप में काम करना बहुत अच्छा है क्योंकि वह एक परिवार की तरह सभी के साथ व्यवहार करते हैं। यह एक कलाकार के रूप में उनके साथ काम करने के लिए बहुत आभारी हैं। फिल्म के निर्माता रजनीश राम पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुझे फिल्म का विषय पसंद आया! इतना कि एक निर्माता के रूप में मैंने तुरंत हां कह दिया क्योंकि ऐसी चीजें और विषय मिलना मुश्किल है जो महिलाओं के दर्द और संघर्ष को इतनी खूबसूरती से बयान कर सकते हैं। मेरे अनुसार फिल्म से जुड़े सभी अभिनेताओं और तकनीशियनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। दुष्यंत सिंह के साथ अपनी पुरानी दोस्ती के कारण  एक निर्देशक के रूप में उनसे अच्छा तालमेल रहा और फिल्म में एक अभिनेत्री के रूप में कविता के अभिनय से भी बहुत प्रभावित हुए हैं क्योंकि उनकी कड़ी मेहनत के कारण यह अनुमान लगाना कठिन है कि यह उनकी  पहली फिल्म है,  उन्होंने अपना किरदार इतनी अच्छी तरह से निभाया। निर्देशक दुष्यंत सिंह ने फिल्म के अन्य पात्रों के बारे में बताया जो दिनेश बावरा (अभिनेता और हास्य कवि), ज़ैद शेख – अभिनेता हैं। निशा गुप्ता अभिनेत्री ने फिल्म में शानदार काम किया है। चूंकि पूरी फिल्म रात में ही शूट की गई थी, इसलिए फिल्म का पूरा लुक बहुत यथार्थवादी लग रहा है, फिल्म में संगीत संतोष सिंह का है। फिल्म की पटकथा सलीम द्वारा लिखी गई है। फिल्म के अन्य निर्मा सहायक संदीप पुरी, विभव तोमर, प्रतिमा तोतला और रितु सिंह हैं।

 

 

इस आलेख के साथ दिए गए सभी छायाचित्र तथा विवरण बॉलीवुड के फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

*******