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चुनौती कोरोना और लॉक डाउन की!

एक बार फिर से आज कोरोना के बारे में चर्चा करने का मन है। यद्यपि हमारे देश का निष्पादन पश्चिम के देशों के मुकाबले कहीं अच्छा रहा है, शायद इसमें जलवायु और बचपन में लगने वाले टीकों का भी कुछ योगदान हो। लेकिन जो भी हो, ऐसा स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि पिछले कुछ दिनों से मामले निरंतर बढ़ रहे हैं और पूरी संभावना है कि लॉक डाउन की अवधि को और बढ़ाना पड़ेगा।

 

हमारी राष्ट्रीय सरकार और प्रदेश सरकारों द्वारा काफी कदम उठाए जा रहे हैं, जो संभव है इस अचानक आई महामारी के संदर्भ में पर्याप्त न हों। ऐसे में कुछ नागरिकों का व्यवहार ऐसा भी है जिससे लगता है कि उनका इरादा सरकार के प्रयासों को फेल कराने का ही हो। उन्होंने जैसे ऐसा माना हुआ है कि वे तो मरेंगे ही बहुत से लोगों को और साथ में लेकर मरेंगे। ऐसे लोगों के साथ वही व्यवहार किया जाना चाहिए, जैसा शातिर अपराधियों के साथ किया जाता है।

मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर इस महासंकट का मुकाबला सफलतापूर्वक कर ही लेंगे। बहुत सी समस्याएं इसके साथ और भी जुड़ी हैं जिनसे निपटना होगा, जैसे फसलें खेतों में तैयार हैं, उनकी कटाई के लिए मजदूर और उनको बाजार तक पहुंचाने के लिए यातायात के साधन, उसकी अनुमति अभी नहीं है। इन सबका भी समाधान खोजना होगा। सरकार द्वारा यथासंभव आसपास ही कृषि उत्पादों की खरीद और उनको गोदाम तक पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।

सबसे बड़ी समस्या मेरे विचार में उन लोगों की है जो दैनिक मजदूर हैं, रोज कुआं खोदकर पानी पीते हैं। हमने देखा कि किस प्रकार उनकी भगदड़ मची थी जब वे जान की परवाह ने करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ अपने घरों के लिए चल दिए थे!
सरकार द्वारा गरीब और बेसहारा लोगों को भोजन और कुछ आमदनी उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन मैं एक बार फिर से दोहराना चाहता हूँ कि सरकार के लिए सब लोगों तक पहुंचना संभव नहीं होता। जैसे एक उदाहरण तो टैक्सी चलाने वालों का ही है, जो बहुत बड़ी संख्या में आज बेकार बैठे हैं।

मेरा यही विनम्र अनुरोध है कि आर्थिक रूप से मजबूत लोग, जो दूसरों की मदद करने में सक्षम हैं, वे अपने आसपास ऐसे लोगों की तलाश करें और उनकी यथासंभव मदद करें, जिससे वे संकट की इस घड़ी से सुरक्षित बाहर आ सकें। खास तौर पर ऐसे लोग, जो किसी से मदद नहीं मांग पाते, वे यह भी नहीं बता पाते कि उनकी हालत बहुत खराब है। कहीं ऐसा न हो कि किसी को हमारे होते हुए कोई बदहाली में प्राण त्यागने पड़ें अथवा अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े। यह हमारी सरकार और प्रत्येक जागरूक नागरिक के लिए परीक्षा की घड़ी है और मुझे विश्वास है कि हम इस चुनौती का भली प्रकार सामना करेंगे।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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