दहर से आज़ाद किया!

सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उसने ये इरशाद किया,
जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया|

जोश मलीहाबादी

ख़तरा-ए-दार-ओ-रसन तो है!

एलान-ए-हक़ में ख़तरा-ए-दार-ओ-रसन तो है,
लेकिन सवाल ये है कि दार-ओ-रसन के बा’द|

कैफ़ी आज़मी