साँस लेने की ज़हमत तमाम हो गई!

जब आई मौत तो राहत की साँस ली हमने,
कि साँस लेने की ज़हमत तमाम हो गई है|

राजेश रेड्डी

ख़ामोश तो मंज़र न फ़ना का होता!

ऐसा ख़ामोश तो मंज़र न फ़ना का होता,
मेरी तस्वीर भी गिरती तो छनाका होता|

गुलज़ा

खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ!

हर गाम पर तरीक़-ए-मोहब्बत में मौत थी,
इस राह में खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी

याद वो सूरत कहाँ कहाँ!

फ़र्क़ आ गया था दौर-ए-हयात-ओ-ममात में,
आई है आज याद वो सूरत कहाँ कहाँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी

मुझे तूने मुसीबत से निकाला!

ऐ मौत मुझे तूने मुसीबत से निकाला,
सय्याद समझता था रिहा हो नहीं सकता|

मुनव्वर राना

तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा!

ज़िंदगी तेरी अता है तो ये जाने वाला,
तेरी बख़्शिश तिरी दहलीज़ पे धर जाएगा|

अहमद फ़राज़

ज़िंदगी का अरमान कर लिया है!

अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ,
फिर हमने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है|

राजेश रेड्डी

लौटने का सामान कर लिया है!

दुनिया में आँखें खोली हैं मूँदने की ख़ातिर,
आते ही लौटने का सामान कर लिया है|

राजेश रेड्डी