वो भी बहुत ग़म से चूर था!

कल मैंने उसको देखा तो देखा नहीं गया,
मुझ से बिछड़ के वो भी बहुत ग़म से चूर था|

मुनीर नियाज़ी

ज़िंदगी हिज्र की कहानी है!

मुझसे कहता था कल फ़रिश्ता-ए-इश्क़,
ज़िंदगी हिज्र की कहानी है|

फ़िराक़ गोरखपुरी

बहुत अपने से डर शाम के बाद!

यही मिलने का समय भी है बिछड़ने का भी,
मुझको लगता है बहुत अपने से डर शाम के बाद|

कृष्ण बिहारी ‘नूर’

तिरे साथ एक दुनिया थी!

हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा’द ये मा’लूम,
कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी|

अहमद फ़राज़

मिल के बिछड़ना ज़रूर था!

दुनिया है ये किसी का न इसमें क़ुसूर था,
दो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था|

आनंद नारायण मुल्ला

वो मलाल में मिला मुझे!

गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला,
मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे|

मुनीर नियाज़ी

यकीं कुछ कम है!

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फिर होगी,
दिल में उम्मीद तो काफी है, यकीं कुछ कम है|

शहरयार

तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम!

किसी आँख में नहीं अश्के-ग़म, तेरे बाद कुछ भी नहीं है कम,
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

जो नहीं मिला उसे भूल जा!

कहाँ आके रुकने थे रास्ते, कहाँ मोड़ था उसे भूल जा,
जो मिल गया उसे याद रख, जो नहीं मिला उसे भूल जा।

अमजद इस्लाम

हथेली पे मेरा नसीब था!

मैं उसको देखने को तरसती ही रह गई,
जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था|

अंजुम रहबर