समुंदर नज़र आया होगा!

अपने जंगल से जो घबरा के उड़े थे प्यासे,
हर सराब उन को समुंदर नज़र आया होगा|

कैफ़ी आज़मी

जब अपनी प्यास के–

जब अपनी प्यास के सहरा से डर गया हूँ मैं,
नदी में बांध के पत्थर उतर गया हूँ मैं|

सूर्यभानु गुप्त